आधुनिकता की अंधी दौड़ में जहां आज की पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर होती जा रही है, वहीं लालपुर स्थित जैनम हाइट्स सोसाइटी ने एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठी मिसाल पेश की है। इस बार सोसाइटी के गणेशोत्सव पंडाल में एक ऐसा मनमोहक दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया। यहां गणपति बप्पा की स्थापना और मुख्य पूजा किसी बड़े यजमान के हाथों से नहीं, बल्कि सोसाइटी के छोटे-छोटे मासूम बच्चों के हाथों से संपन्न कराई गई।
इस विशेष आयोजन के पीछे महिलाओं की एक गहरी और सकारात्मक सोच जुड़ी हुई है। इस बारे में बताते हुए महिलाओं ने साझा किया कि हम सभी अक्सर बच्चों के संस्कारों की सिर्फ बातें ही करते हैं, लेकिन जब उनके अपने हाथों से गणपति बप्पा की स्थापना और पूजा करवाई गई और साथ ही पंडित जी ने इसका धार्मिक महत्व समझाया, तो इससे बच्चों को अपने संस्कारों में अटूट विश्वास रखने और उनमें सीधे तौर पर भाग लेने का सुनहरा अवसर मिला।

पंडित जी ने इस दौरान बच्चों को पूजा-पाठ के हर एक चरण और उसके आध्यात्मिक महत्व को बहुत ही सरल और रोचक तरीके से समझाया। वहीं, बप्पा के आगमन से उत्साहित बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था। बच्चों ने अपनी मासूमियत से बताया कि आज उनके अपने गणपति बप्पा उनके घर आए हैं और वे सब उनके साथ आने वाले कई दिनों तक पूजा-पाठ करेंगे और खूब मस्ती करेंगे। बच्चों के चेहरे पर बप्पा को लेकर जो अपनापन और उत्साह था, वह देखते ही बनता था।
इस अनूठी पहल के बारे में विस्तार से बताते हुए सोसाइटी की अजन्ता जी ने कहा कि जब तक हम नई पीढ़ी को उनके धर्म, संस्कृति और परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित नहीं कराएंगे, तब तक हम उन्हें सही मायनों में संस्कारित नहीं कर सकते। बच्चों में धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए ही इस परंपरा की शुरुआत की गई है। उन्होंने यह भी याद किया कि पिछले वर्ष भी सोसाइटी की ओर से सभी बच्चों को उनके अपने व्यक्तिगत चांदी के गणपति उपहार में दिए गए थे, ताकि बच्चों के मन में बप्पा के प्रति और अधिक जुड़ाव पैदा हो सके।
जैनम हाइट्स सोसाइटी का यह आयोजन आज के समय में हर आवासीय परिसर और समाज के लिए एक बेहतरीन संदेश देता है। यह पहल साबित करती है कि यदि बच्चों को शुरुआत से ही अपनी संस्कृति के करीब रखा जाए, तो वे अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े रहते हैं। सोसाइटी के सदस्यों ने क्षेत्र के सभी नागरिकों को इस गणेशोत्सव में शामिल होने और बच्चों को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराने का खुला आमंत्रण दिया है।







