आरंग :-
यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की संभावित योजना का कांग्रेस ने विरोध किया है। जनपद पंचायत पूर्व अध्यक्ष खिलेश देवांगन ने केंद्र सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने और किसी भी तरह का उपभोक्ता शुल्क नहीं लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने देश में डिजिटल और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा दिया, जिसके बाद यूपीआई आज करोड़ों लोगों के लिए रोजमर्रा के लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर किसान, मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थी और मध्यम वर्ग के लोग किराना, दवा, यात्रा सहित छोटी-बड़ी जरूरतों के भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं,
खिलेश देवांगन ने कहा, यदि प्रत्येक यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। दुकानदार अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए ग्राहकों से अधिक राशि वसूल सकते हैं। इससे छोटे लेनदेन करने वाले लोगों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने एनपीसीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगस्त 2026 में यूपीआई पर करीब 24.51 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपए रहा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले डिजिटल भुगतान माध्यम पर शुल्क लगाने से व्यापक असर पड़ेगा। कांग्रेस ने यूपीआई को शुल्क-मुक्त बनाए रखने की मांग की है।







