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चुनाव आयोग में घमासान: SIR के तहत 13 करोड़ नाम हटाने पर CEC और चुनाव आयुक्तों में मतभेद, EC ने दी सफाई

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वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में ही कोहराम मच गया है। SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से 13 करोड़ से ज़्यादा नाम हटाने के बाद इलेक्शन कमीशन में फूट पड़ गया है। दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के फैसले से नाराज हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi ) ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। अब पूरे मामले में चुनाव आयोग का बयान आया है।

चुनाव आयोगने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)  समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। एसआईआर पर सभी फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए।

बता दें कि चुनाव आयोग के बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ, दो अन्य चुनाव आयुक्तों का पैनल लेता है। इनमें से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एपआईआर में लिए फैसले पर आपत्तियां जताई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई मसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्तियां जताई. उन्होंने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। दोनों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फैसले आयोग के सामने बहुमत के आधार पर नहीं रखे गए।

 

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