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साइबर फ्रॉड से बचाव: सावधानी ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच – अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी

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-डिजिटल सुविधा बढ़ी तो ऑनलाइन ठगी के तरीके भी हुए जटिल — अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की

आज बैंकिंग, खरीदारी, डिजिटल भुगतान, निवेश, सरकारी सेवाओं और आपसी संवाद का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रहा है। डिजिटल तकनीक ने जहां जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के नए और जटिल तरीके भी विकसित किए हैं। फर्जी कॉल, नकली वेबसाइट और लिंक, ओटीपी की मांग, फर्जी कस्टमर केयर, डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर धमकी, ऑनलाइन निवेश और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी का कहना है कि साइबर फ्रॉड से बचने के लिए केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं है। सतर्क रहना, जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना और किसी अनजान व्यक्ति के साथ गोपनीय जानकारी साझा नहीं करना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय हैं।

क्या करें?

ओटीपी और पासवर्ड साझा न करें:
बैंकिंग पासवर्ड, UPI PIN, OTP, CVV अथवा कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी संस्था के नाम पर फोन करने वाला व्यक्ति यदि ऐसी जानकारी मांगे तो पहले उसकी पहचान और उद्देश्य की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।

अनजान लिंक से सावधान रहें:
SMS, WhatsApp, ई-मेल या सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। किसी सेवा की वेबसाइट पर जाना हो तो उसका आधिकारिक पता स्वयं टाइप करना या आधिकारिक ऐप का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित है।

बैंकिंग अलर्ट को नजरअंदाज न करें:
खाते में किसी अनजान लेन-देन का संदेश मिलने पर तत्काल बैंक के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर रकम वापस भेजने की जल्दबाजी न करें।

फर्जी कस्टमर केयर से बचें:
सर्च इंजन या सोशल मीडिया से मिले कस्टमर केयर नंबर पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। संबंधित बैंक, कंपनी या सेवा की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से संपर्क विवरण प्राप्त करें।
सोशल मीडिया पर सीमित जानकारी साझा करें:
मोबाइल नंबर, पता, पहचान संबंधी दस्तावेज, बैंकिंग विवरण और अन्य निजी जानकारी को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने से बचना चाहिए।

डिजिटल सुरक्षा मजबूत रखें:
मोबाइल और ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करें। मजबूत पासवर्ड, स्क्रीन लॉक तथा उपलब्ध होने पर बहु-स्तरीय सुरक्षा का उपयोग करें।

क्या न करें?
अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड न करें।
किसी को मोबाइल की स्क्रीन शेयर या रिमोट एक्सेस न दें।
QR कोड देखकर यह न मानें कि उससे आपको पैसा प्राप्त होगा। भुगतान के लिए QR कोड स्कैन करने पर आपके खाते से रकम जा सकती है।

“अभी भुगतान करें”, “खाता बंद हो जाएगा” या “कानूनी कार्रवाई होगी” जैसे दबाव वाले संदेशों में घबराकर निर्णय न लें।

ऑनलाइन नौकरी, निवेश, लॉटरी या इनाम के आकर्षक प्रस्तावों पर बिना सत्यापन के पैसा न लगाएं।
बैंक खाते, कार्ड, UPI PIN, CVV और OTP जैसी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
ठगी हो जाए तो तुरंत कार्रवाई करें

साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में समय पर कार्रवाई महत्वपूर्ण है। पीड़ित को तत्काल अपने बैंक या संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए। भारत में साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in का उपयोग किया जा सकता है।

शिकायत करते समय लेन-देन संबंधी SMS, स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर, चैट, ई-मेल, UPI ID, ट्रांजेक्शन विवरण तथा₹ अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। साक्ष्यों को डिलीट या उसमें अनावश्यक बदलाव करने से बचना चाहिए।

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी के अनुसार, साइबर अपराध से बचाव केवल तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक को डिजिटल माध्यम का उपयोग करते समय सावधानी को अपनी आदत बनाना होगा। “डिजिटल सुविधा का उपयोग करें, लेकिन बिना सत्यापन के डिजिटल भरोसा न करें।”

आज थोड़ी-सी सावधानी भविष्य में होने वाले बड़े आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान से बचा सकती है।

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