रायपुर। छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का सिलसिला शुरू होने के साथ ही मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने और आसमान साफ होने से कई इलाकों में धूप का असर बढ़ने लगा है। इसके चलते आने वाले दिनों में गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर सकती है। इस बार प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से 5 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई, लेकिन जिलेवार आंकड़ों में वर्षा का बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहां कुछ जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई, वहीं सरगुजा, जशपुर और बेमेतरा जैसे जिलों में बारिश की कमी बनी रही।
मानसून सीजन के दौरान छत्तीसगढ़ में कुल 1,195.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा का आंकड़ा 1,142.1 मिलीमीटर है। इस प्रकार प्रदेश में सामान्य से लगभग 53 मिलीमीटर अधिक पानी बरसा। हालांकि, राज्य का औसत आंकड़ा सभी जिलों की वास्तविक स्थिति नहीं दर्शाता। कहीं अच्छी बारिश हुई, तो कहीं सामान्य वर्षा का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इस असमानता का असर स्थानीय जल उपलब्धता, खेती और ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियों पर पड़ सकता है।
सरगुजा, जशपुर और बेमेतरा में बारिश की भारी कमी
जिलेवार वर्षा के आंकड़ों में सरगुजा सबसे अधिक कमी वाले जिलों में शामिल रहा। सरगुजा में 687.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। इसी तरह जशपुर में 873.5 मिलीमीटर और बेमेतरा में 674.1 मिलीमीटर बारिश हुई। इन दोनों जिलों में सामान्य से 36 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा कोरिया में 947.8 मिलीमीटर और रायगढ़ में 1,027.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 14 प्रतिशत कम रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पूरे प्रदेश में औसतन अच्छी बारिश होने के बावजूद कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी बनी रही।
नारायणपुर और बलरामपुर में जमकर बरसे बादल
दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ जिलों में मानसून काफी मेहरबान रहा। नारायणपुर में 1,715.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 40 प्रतिशत अधिक है। बलरामपुर में 1,553.5 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 55 प्रतिशत अधिक रही। गरियाबंद में 1,436.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 36 प्रतिशत अधिक है। वहीं रायपुर में 1,322.9 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक रही। दंतेवाड़ा और बीजापुर में भी सामान्य से क्रमशः 12 और 11 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इस तरह प्रदेश में मानसून का प्रभाव अलग-अलग जिलों में अलग-अलग दिखाई दिया।
जून में कमजोर शुरुआत, जुलाई और सितंबर में अच्छी बारिश
इस साल मानसून सीजन की शुरुआत में छत्तीसगढ़ में बारिश की कमी देखने को मिली। जून में केवल 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 193.5 मिलीमीटर थी। इसके बाद जुलाई में बारिश ने रफ्तार पकड़ी और 494 मिलीमीटर पानी बरसा, जो सामान्य से लगभग 32 प्रतिशत अधिक था। अगस्त में 355.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य के आसपास रही। सितंबर में भी 279.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से लगभग 34 प्रतिशत अधिक थी। बाद के महीनों में हुई अच्छी बारिश के कारण शुरुआती कमी की काफी हद तक भरपाई हुई और पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया।
मानसून की विदाई के साथ क्यों बढ़ रही गर्मी और उमस?
मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने के बाद आसमान साफ होने लगता है और धूप सीधे जमीन तक पहुंचती है। बारिश के बाद वातावरण में मौजूद नमी के कारण तापमान सामान्य रहने पर भी उमस अधिक महसूस हो सकती है। मौसम संबंधी रिपोर्टों में अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में दोपहर के समय तेज धूप और उमस से लोगों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, तापमान की स्थिति अलग-अलग शहरों और जिलों में भिन्न रह सकती है।
अक्टूबर में कैसा रहेगा मौसम?
अक्टूबर में मानसून की वापसी के बावजूद स्थानीय मौसम की परिस्थितियों के आधार पर कहीं-कहीं बारिश की संभावना बनी रह सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार ही आने वाले दिनों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने जिले का मौसम अपडेट नियमित रूप से देखते रहें। किसानों को फसलों की कटाई, सुखाने और भंडारण के दौरान मौसम का ध्यान रखने की जरूरत है। वहीं, बढ़ती गर्मी और उमस से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीना और दोपहर में तेज धूप से बचना उपयोगी रहेगा।
इस मानसून की सबसे बड़ी तस्वीर
छत्तीसगढ़ में इस बार कुल वर्षा का आंकड़ा सामान्य से अधिक रहा, लेकिन जिलेवार असमानता सबसे महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आई है। एक ओर नारायणपुर, बलरामपुर और गरियाबंद जैसे जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई, वहीं सरगुजा, जशपुर और बेमेतरा में वर्षा की कमी बनी रही। अब मानसून की विदाई के साथ प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। आने वाले दिनों में गर्मी, उमस और स्थानीय बारिश की स्थिति पर लोगों की नजर रहेगी।







