आरंग संवाददाता – सोमन साहू
रायपुर: छत्तीसगढ़ में अपनी विभिन्न न्यायसंगत मांगों को लेकर प्रदेशभर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। पटवारियों के काम पर नहीं लौटने से राजस्व विभाग से जुड़े तमाम कामकाज पूरी तरह ठप हो गए हैं। इसका सीधा असर आम जनता, किसानों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने रोजमर्रा के कामों और दस्तावेजों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, इस संवेदनशील मुद्दे पर सियासत गर्मा गई है। प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखा निशाना साधा है।
“जनता त्रस्त, और सरकार गहरी नींद में”: डॉ. डहरिया
वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। पटवारियों के हड़ताल पर जाने से किसान अपनी जमीनी कागजी कार्रवाई, ऋण-पुस्तिका, नामांतरण और सीमांकन जैसे जरूरी कार्यों के लिए तहसीलों और कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, छात्र अपने जाति, निवास और आय प्रमाण पत्रों के अभाव में भविष्य की परीक्षाओं और दाखिलों को लेकर चिंतित हैं। डॉ. डहरिया ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि”छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने में व्यस्त है। कर्मचारियों की जायज मांगों पर समय रहते संवाद स्थापित करने के बजाय सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। अन्नदाता किसान और हमारे प्रदेश के युवा छात्र सरकारी तंत्र की इस संवेदनहीनता की भारी कीमत चुका रहे हैं।”
आम जनता और किसानों की बढ़ रही मुश्किलें
राजस्व विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले पटवारियों के हड़ताल पर होने से मैदानी स्तर पर कामकाज पूरी तरह ठप है। स्थिति यह है कि किसान धान खरीदी, फसल कटाई और अन्य कृषि कार्यों के बीच भूमि संबंधी सुधारों व दस्तावेजों के लिए भटक रहे हैं।छात्र छात्रवृत्ति और शैक्षणिक प्रवेश के लिए आवश्यक आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र न मिलने से परेशान हैं। आम नागरिकभूमि क्रय-विक्रय, नामांतरण और बंटाकन जैसे जरूरी मामलों में तारीख पर तारीख मिलने से मायूस हैं।
कांग्रेस की चेतावनी: जल्द समाधान निकाले सरकार
डॉ. शिवकुमार डहरिया ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही संवेदनशीलता दिखाते हुए पटवारियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की और प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी।







