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बिलासपुर आबकारी में ‘सिस्टम’ फेल बिल्हा सर्किल में 50 हजार की कथित डील 15 साल से जमे ड्राइवर का ‘साहब’ वाला रौब और वर्तमान अधिकारी की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

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संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन और जीरो टॉलरेंस की बात करती है लेकिन बिलासपुर जिले के बिल्हा सर्किल में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सिलपहरी और पौड़ी क्षेत्र में दो दिन पहले हुई एक कथित कार्रवाई से जुड़े दो सनसनीखेज वीडियो सामने आने के बाद आबकारी विभाग की पूरी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। यह मामला अब सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विभाग के अंदर पनप रहे ड्राइवर राज और वर्तमान सर्किल की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
पार्ट-1: दो वीडियो से कैसे खुली पोल
मामला तब तूल पकड़ा जब दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पहले वीडियो में आबकारी विभाग की टीम सरकारी वाहन के साथ कार्रवाई करते हुए दिखाई दे रही है।
दूसरे वीडियो में एक पीड़ित महिला सामने आकर गंभीर आरोप लगाती दिख रही है। महिला का कथित आरोप है कि उसके बेटे को आधा पाव गांजा होने का हवाला देकर पकड़ा गया और फिर 50 हजार रुपये की कथित मांग की गई। महिला का दावा है कि पैसे का इंतजाम होने के बाद ही उसके बेटे को छोड़ा गया।
इसी कड़ी में एक युवक भी सामने आया है जिसने टीम पर अभद्रता गाली-गलौज और जबरन गाड़ी में बैठाने का आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि उसने सिर्फ कार्रवाई का कारण पूछा था।
पार्ट-2: हाईलाइट – वर्तमान सर्किल अधिकारी की भूमिका पर सबसे बड़े सवाल
इस पूरे मामले में सबकी नजर अब वर्तमान बिल्हा सर्किल के प्रभारी अधिकारी पर टिकी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में कार्रवाई का तरीका पूरी तरह बदल गया है। पहले जहां कार्रवाई नियमानुसार और दस्तावेजों के साथ होती थी, वहीं अब आरोप लग रहे हैं कि कार्रवाई के नाम पर लोगों को डराया-धमकाया जाता है।
वर्तमान अधिकारी से सीधे सवाल 
1. आपकी टीम जिस कार्रवाई के लिए गई थी उसका कोई लिखित सूचना पत्र या पंचनामा क्यों नहीं बनाया गया? 2. यदि मौके पर कोई अवैध माल नहीं मिला तो फिर इतना हंगामा और युवक को गाड़ी में बैठाने की नौबत क्यों आई? 3. टीम के साथ गए वाहनों का लॉगबुक और जीपीएस रिकॉर्ड क्या कहता है? 4. आपके कार्यकाल में बिल्हा सर्किल में शिकायतों का ग्राफ अचानक क्यों बढ़ गया है
एक जिम्मेदार अधिकारी की पहचान सिर्फ कार्रवाई करने से नहीं बल्कि कार्रवाई को पारदर्शी तरीके से करने से होती है।
पार्ट-3: हाईलाइट – विभाग का छाया साहब’ – 15 साल से जमे ड्राइवर का राज
इस पूरे कांड का सबसे चौंकाने वाला और सबसे गंभीर पहलू है  आबकारी विभाग का स्थायी ड्राइवर।
नियम के अनुसार ड्राइवर का काम सिर्फ गाड़ी चलाना है। उसका काम जनता से पूछताछ करना, धमकाना या वसूली करना नहीं है। लेकिन बिलासपुर आबकारी में पदस्थ एक ड्राइवर को लेकर जो चर्चाएं हैं वो बेहद गंभीर हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार – यह ड्राइवर पिछले 12 से 15 साल से भी ज्यादा समय से एक ही जिले में एक ही सर्किल में जमा हुआ है। न उसका ट्रांसफर होता है न उस पर कोई कार्रवाई होती है। आरोप है कि यह अब ड्राइवर कम और ‘छाया अधिकारी’ ज्यादा बन गया है।
आरोप क्या हैं
फील्ड में अधिकारी से पहले यही जनता को रौब दिखाता है।  आम लोगों को डराने-धमकाने और कथित तौर पर पैसों की बात करने का आरोप इसी पर लग रहा है। कई पीड़ितों ने दबे जुबान में बताया कि साहब से बात होने से पहले इसी से सेटिंग’ की बात करनी पड़ती है।
सबसे बड़ा सवाल – इस ड्राइवर को संरक्षण कौन दे रहा है? एक मामूली ड्राइवर का 15 साल तक एक ही सर्किल में टिके रहना बिना किसी बड़े संरक्षण के संभव नहीं है। क्या इस ड्राइवर के तार ऊपर तक जुड़े हैं क्या इसकी आय और संपत्ति की जांच नहीं होनी चाहिए
पार्ट-4: छवि पटेल युग Vs वर्तमान युग – फर्क साफ है
इस पूरी कहानी में एक नाम को लोग आज भी इज्जत से याद करते हैं – छवि पटेल जी।
स्थानीय लोगों का एक स्वर में कहना है कि जब तक बिल्हा सर्किल में छवि पटेल जी सर्किल अधिकारी के रूप में पदस्थ थे तब तक पूरे सर्किल में अनुशासन था। कार्रवाई का मतलब कार्रवाई होता था। जब्ती होती थी केस बनता था पंचनामा होता था।
वर्तमान में स्थिति बिल्कुल उलट है। अब कार्रवाई का मतलब विवाद, वीडियो वायरल और 50 हजार की कथित डील की चर्चाएं हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर छवि पटेल जी के जाने के बाद ऐसा क्या बदल गया कि एक शांत सर्किल अब सुर्खियों में है
पार्ट-5: चखना दुकानों का खेल
यह मामला सिर्फ एक महिला के आरोप तक सीमित नहीं है। मस्तूरी सर्किल में तैनाती के दौरान भी वर्तमान टीम पर कथित तौर पर अवैध चखना दुकानों को संरक्षण देने के आरोप लगे थे। सवाल वही है – जिले में कितनी चखना दुकानें वैध हैं और कितनी अवैध रूप से सिर्फ मेहरबानी से चल रही हैं
अंत में – शासन-प्रशासन और जिला आबकारी उप-आयुक्त से हमारे 11 तीखे सवाल
1. सहायक आबकारी आयुक्त महोदय 50 हजार की कथित डील के दो वीडियो वायरल हुए 72 घंटे हो गए, आप अभी तक मौन क्यों हैं
2. वर्तमान बिल्हा सर्किल प्रभारी से आपने अभी तक लिखित स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा
3. 15 साल से एक ही जगह जमे ड्राइवर का ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा रहा है उसे किसका संरक्षण प्राप्त है
4. यदि युवक नशे में था तो उसका मेडिकल और कानूनी कार्रवाई का दस्तावेज कहां है
5. यदि मौके पर माल मिला था तो जब्ती पंचनामा कहां है
6. छवि पटेल जी के कार्यकाल के बाद बिल्हा सर्किल में शिकायतें क्यों बढ़ीं
7. जिले की वैध-अवैध चखना दुकानों की लिस्ट सार्वजनिक कब होगी
8. दोनों वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच कब होगी
9. क्या इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाएगी
10. क्या ड्राइवर की कॉल डिटेल और आर्थिक लेन-देन की जांच होगी
11. शासन की जीरो टॉलरेंस नीति आबकारी में कब दिखेगी
डिस्क्लेमर: यह समाचार पूरी तरह जनचर्चा स्थानीय सूत्रों, प्राप्त दो वीडियो और दोनों पक्षों के कथनों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति अधिकारी या विभाग की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि जनहित में पारदर्शिता लाना है।
 वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि छत्तीसगढ़ जनता की आवाज नहीं करता है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष आते ही उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। टीम – छत्तीसगढ़ जनता की आवाज

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