संवाददाता – हेमलाल झारिया
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम कलगामार में प्रस्तावित कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर ग्रामीणों में विरोध के स्वर तेज होते नजर आ रहे हैं। जमीन बचाने के मुद्दे पर लगभग दर्जनों गांवों के ग्रामीण कलगामार में एकत्रित हुए।
इस दौरान सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी में बैठक आयोजित की गई, जिसमें कोल ब्लॉक के लिए जमीन नहीं देने को लेकर अपनी बात रखी गई।
जमीन बचाने के लिए एकजुट हुए ग्रामीण
बैठकमें शामिल ग्रामीणों ने कोल ब्लॉक नीलामी और भविष्य में होने वाली खनन गतिविधियों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन केवल उनकी संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में कोयला खनन के लिए जमीन देने का सवाल उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

लगभग दर्जनों गांवों के ग्रामीणों का एक साथ जुटना इस मुद्दे पर क्षेत्र में बन रही एकजुटता को दर्शाता है। बैठक में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय रही।
महिलाओं ने भी उठाई जमीन और भविष्य की चिंता
कलगामार में आयोजित बैठक में सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया। ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से स्पष्ट है कि कोल ब्लॉक का मुद्दा केवल जमीन के स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध परिवार, खेती-किसानी और गांवों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

ग्रामीणों की प्रमुख भावना है कि उनकी जमीन के संबंध में कोई भी निर्णय लेते समय स्थानीय लोगों की सहमति, उनके अधिकारों और भविष्य की आजीविका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जल, जंगल और जमीन को लेकर बढ़ रही चिंता
कोरबा जिले के करतला क्षेत्र में प्रस्तावित कोल ब्लॉकों को लेकर पहले भी ग्रामीणों का विरोध सामने आ चुका है। फरवरी 2026 में चचिया चौक पर लगभग एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों ने कोल ब्लॉक नीलामी के विरोध में प्रदर्शन किया था। उस समय ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।
ग्रामीणों को आशंका है कि बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां शुरू होने से उनकी जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय जीवनशैली पर असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं तथा कोल ब्लॉक से संबंधित आगे की प्रक्रिया क्या रहती है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजर बनी हुई है।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों की मांगों पर संबंधित अधिकारी किस प्रकार सुनवाई करते हैं।







