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सिंघनपुर की बेटी सात्रिका टंडन ने बढ़ाया सारंगढ़-बिलाईगढ़ का मान, ‘गाबो बजाबो गोठियाबो’ में बिखेरा अपनी प्रतिभा का रंग

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सारंगढ़ संवाददाता – अशोक मनहर
बचपन से गीत-संगीत के प्रति रहा जुनून, सरकारी नौकरी की तैयारी के बीच भी नहीं छूटा संगीत का साथ; आज शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेकर अपने सपनों की ओर बढ़ा रहीं कदम
कोसीर – प्रतिभा किसी बड़े शहर या संपन्न परिवार की मोहताज नहीं होती, अगर मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो और सपनों को पूरा करने का दृढ़ संकल्प, तो छोटे से गांव की बेटी भी अपनी पहचान बड़े मंचों तक बना सकती है। इसकी एक प्रेरक मिसाल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम पंचायत सिंघनपुर की सात्रिका टंडन हैं, जिन्हें छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कार्यक्रम ‘गाबो बजाबो गोठियाबो’ में अपनी प्रतिभा और संगीत के सफर को साझा करने का अवसर मिला। यह कार्यक्रम राकेश तिवारी से जुड़ा है, जहां विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले लोगों को अपनी कला और अनुभव साझा करने का मंच मिलता है!
बचपन में जागा संगीत का शौक, धीरे-धीरे बना जीवन का लक्ष्य
सात्रिका टंडन एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। बचपन से ही उन्हें गीत-संगीत के प्रति गहरी रुचि थी। भजन और पंथी गीतों सहित संगीत की विभिन्न विधाओं से उनका जुड़ाव रहा। समय के साथ यह रुचि केवल शौक तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई, स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सात्रिका सरकारी नौकरी पाने के लिए कठिन परिश्रम कर रही थीं। जीवन में स्थिरता और बेहतर भविष्य की चाह के बीच भी संगीत के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ। एक ओर नौकरी की तैयारी चलती रही, तो दूसरी ओर उनके मन में संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी अलग पहचान बनाने का सपना भी जीवित रहा।
रायगढ़ से शुरू हुआ शास्त्रीय संगीत की शिक्षा का सफर
संगीत के प्रति बढ़ते लगाव ने सात्रिका को अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रायगढ़ स्थित चक्रधर संगीत विद्यालय से शास्त्रीय संगीत में डिप्लोमा किया। इस शिक्षा ने संगीत के प्रति उनकी समझ को और गहरा किया तथा इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का उनका संकल्प मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने रायपुर स्थित कमला देवी संगीत महाविद्यालय से शास्त्रीय संगीत में बीपीए (Bachelor of Performing Arts) का कोर्स किया। इस तरह उन्होंने अपनी रुचि को विधिवत शिक्षा और साधना से जोड़कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
परिवार का साथ बना हौसले की ढाल
सात्रिका के सफर का एक भावनात्मक पहलू उनके परिवार का सहयोग भी है। किसी भी कलाकार के लिए अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ना आसान नहीं होता, खासकर तब, जब उसे अपने भविष्य को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सात्रिका के शुरुआती सफर में परिवार से अपेक्षित सहयोग को लेकर संघर्ष रहा, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं। आज उनका परिवार उनके साथ मजबूती से खड़ा है। परिवार का यह साथ उनके लिए केवल सहयोग नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला भी है, किसी सपने को पूरा करने के लिए प्रतिभा और मेहनत जितनी जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण अपनों का विश्वास भी होता है। सात्रिका की कहानी इसी बदलाव और विश्वास की कहानी है, जहां कभी रास्ता कठिन नजर आता था, वहीं आज परिवार उनके सपनों की राह में ढाल बनकर खड़ा है।
‘गाबो बजाबो गोठियाबो’ के मंच तक पहुंचीं सिंघनपुर की बेटी
अपने संगीत सफर में लगातार आगे बढ़ते हुए सात्रिका टंडन को अब ‘गाबो बजाबो गोठियाबो’ जैसे चर्चित मंच पर साक्षात्कार देने का अवसर मिला। उनके लिए यह उपलब्धि केवल एक कार्यक्रम में शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से संजोए सपनों, मेहनत और संगीत के प्रति समर्पण को साझा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। गांव की गलियों से निकलकर संगीत की विधिवत शिक्षा हासिल करना और फिर एक बड़े मंच पर अपनी यात्रा के बारे में बताना उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो अपनी प्रतिभा को लेकर सपने तो देखते हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण आगे बढ़ने में संकोच करते हैं, सात्रिका का सफर यह संदेश देता है कि किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपनी रुचि को पहचाने, उसे निखारने के लिए मेहनत करे और कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों का साथ न छोड़े।
छोटे गांव से बड़े सपनों तक की प्रेरक यात्रा
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम सिंघनपुर की सात्रिका टंडन की कहानी संगीत के प्रति प्रेम, निरंतर प्रयास और परिवार के सहयोग की कहानी है। सरकारी नौकरी की तैयारी से लेकर शास्त्रीय संगीत में उच्च शिक्षा हासिल करने और प्रतिष्ठित कार्यक्रम में अपनी बात रखने तक का उनका सफर बताता है कि जीवन में अपनी दिशा चुनने के लिए साहस और लगन दोनों जरूरी हैं। सात्रिका की यह उपलब्धि उनके परिवार और गांव के लिए खुशी का अवसर है। उम्मीद है कि उनकी संगीत साधना आगे भी जारी रहेगी और वे अपनी प्रतिभा के दम पर छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को आगे बढ़ाने में योगदान देंगी!
सिंघनपुर की इस बेटी का सफर उन सभी युवाओं के लिए एक संदेश है—सपने वही पूरे होते हैं, जिन्हें परिस्थितियों के भरोसे नहीं, बल्कि मेहनत, विश्वास और निरंतर साधना के सहारे जिया जाता है।

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