जांजगीर-चांपा। जियो कंपनी का सुपरवाइजर बनकर ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर लेने और बाद में उन्हें दूसरे व्यक्ति को बेचकर करीब 9 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में बलौदा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले में फरार चल रहे आरोपी अब्दुल गफूर खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। इससे पहले पुलिस इस प्रकरण में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
ऐसे दिया धोखाधड़ी को अंजाम
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थी विमलेश कुमार अहिर निवासी खिसोरा ने थाना बलौदा में शिकायत दर्ज कराई थी कि 24 जुलाई 2026 को सन्नी लाल पाटले और राहुल कुमार खाण्डे उसके घर पहुंचे। दोनों ने खुद को जियो कंपनी का सुपरवाइजर बताते हुए दो ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर लेने की बात कही। आरोपियों ने प्रत्येक ट्रैक्टर का 30 हजार रुपये मासिक किराया देने का भरोसा दिलाया और दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अपने साथ ले गए।
इसके बाद आरोपियों ने दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को बिलासपुर जिले के एक व्यक्ति के पास करीब 2 लाख रुपये में बेच दिया। प्राप्त रकम में से 50 हजार रुपये खर्च कर दिए। इस तरह प्रार्थी के साथ करीब 9 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई।
पहले दो आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना बलौदा में अपराध क्रमांक 407/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पहले ही आरोपी सन्नी लाल पाटले निवासी बम्हनीन, थाना अकलतरा और राहुल कुमार खाण्डे निवासी खम्हरिया को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था।
मुखबिर की सूचना पर फरार आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में तीसरा आरोपी अब्दुल गफूर खान (46 वर्ष), पिता शब्बीर खान, निवासी मचखंडा, थाना सीपत, जिला बिलासपुर फरार चल रहा था। बलौदा पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर जियो कंपनी का सुपरवाइजर बनकर ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर लेने और बाद में उन्हें दूसरे व्यक्ति को बेचने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक मनोहर सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक रामदुलार साहू, प्रधान आरक्षक गजाधर पाटनवार तथा आरक्षक रज्जू रात्रे, जयराम बिझवार और नारायण भानू का सराहनीय योगदान रहा।







