कुछ महीने की शांति के बाद एक बार फिर बांग्लादेश हिंसा की आग में जलने लगा महंगाई और कम वेतन से परेशान हजारों गारमेंट कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं। कपड़ा मजदूरों को मात्र 12 हजार टका ही मिल रहा है। जबकि कपड़ा मजदूर न्यूनतम 30000 टका मजदूरी की मांग कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि महंगाई और बढ़ती जीवन लागत (भोजन, आवास/किराया, परिवहन और स्वास्थ्य सेवा) ने उनकी क्रय शक्ति काफी घटा दी है। हालांकि सरकार ने इस प्रदर्शन के लिए अवामी लीग को जिम्मेदार ठहराया है।
बता दें कि बांग्लादेश एक बार फिर से उबल पड़ा है। लगभग 28 महीनों के बाद जनता सड़क पर हैं और पुलिसकर्मियों पर हमले कर रहे हैं। इससे पहले शेख हसीना के तख्तापलट के दौरान जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हिंसा भड़की थी। पिछली बार स्टीडेंट्स प्रदर्शन के नाम पर कट्टपंथियों ने हिंसा भड़काई थी।
इस बार कपड़ा मजदूर न्यूनतम 30000 टका मजदूरी की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि ये प्रदर्शन आंदोलन की तरह हो रहा है। कपड़ा मजदूर सड़कों पर निकल रहे हैं, गाड़ियां और दुकानें बंद कर रहे हैं। विरोध करने पर हिंसक हो जा रहे हैं। ये प्रदर्शन 31 अक्तूबर को शुरू हुए थे। मजदूरों ने ढाका (मिरपुर), आशुलिया, सावर, गाजीपुर जैसे औद्योगिक इलाकों में सड़कें जाम कर दी और गारमेंट फैक्ट्रियों को बंद कर दिया था। प्रदर्शन और हड़ताल की वजह से लगभग 529 कारखाने प्रभावित हुए और करीब 10 लाख श्रमिक प्रभावित हुए थे।
राजधानी ढाका के मिरपुर में कई गलियो में प्रदर्शन चल रहा है। सोमवार को मजदूर फिर से सड़क पर आ गए। मजदूर सड़कों पर हैं, कई जगहों पर टकराव की नौबत है। बांग्लादेश के अंग्रेजी अखबार प्रथम आलो ने रिपोर्ट किया है कि आज सोमवार को सुबह लगभग 10:45 बजे, मीरपुर-10 के सेनपारा परबटा इलाके में कुछ मजदूर एक गली से निकलकर मुख्य सड़क पर आने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए खदेड़ा और आंसू गैस के कई गोले दागे। बाद में मीरपुर-2 में स्टेडियम के पास प्रोशिका चौराहे पर भी मजदूरों ने सड़क पर उतरने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया।
बांग्लादेश में गारमेंट इंडस्ट्री में जारी अशांति के पीछे सरकार ने अपदस्थ शेख हसीना सरकार से जुड़े उद्योगपतियों का हाथ होने का आरोप लगाया है। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार के अनुसार गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने 2 नवंबर को कहा कि आवामी लीग से जुड़े कुछ फैक्ट्री मालिक, पूर्व सांसद, मंत्री और राज्य मंत्री कपड़ा उद्योग में अस्थिरता भड़का रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपदस्थ सरकार के समर्थक मजदूरों को उकसाकर हाईवे जाम, आगजनी और हिंसा करा रहे हैं। सरकार के पास इन घटनाओं से जुड़े वीडियो और ऑडियो सबूत भी हैं।