रतनपुर में दीपावली का त्योहार शुरू हो चुका है, बाजार सज चुका है, दीये-फुलझड़ी-रॉकेट की चमक हर तरफ है। लेकिन इसी खुशियों के त्योहार पर पटाखा बाजार को लेकर नगर पालिका प्रशासन और स्थानीय पटाखा व्यापारियों के बीच आपसी मतभेद ने त्योहार का रंग फीका कर दिया है।
आम जनता परेशान है, व्यापारी परेशान है, और त्योहार की रौनक विवाद की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
क्या है पूरा विवाद?
1. व्यापारी एकमत — एक राय से तैयार:
स्थानीय पटाखा व्यापारियों का कहना है — हम एकमत हैं, एक राय से नियत स्थान पर दुकान लगाने को तैयार हैं। हमने अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर ली, दुकानें भी लगा लीं। हम नियम मानने को तैयार हैं, सुरक्षा मानकों का पालन करने को तैयार हैं।
2. नगर पालिका का दबाव — “हमारे मुताबिक दुकान लगेगी”:
वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका के चुने हुए जनप्रतिनिधि और प्रशासन की ओर से दबाव बनाया जा रहा है — “दुकान हमारे मुताबिक लगेगी, हमारे मुताबिक चलेगी।”
व्यापारियों का आरोप है — नगर पालिका अपनी इमेज और प्रतिष्ठा के लिए अपनी व्यवस्था से दुकान उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है। बिजली, पानी, स्थान — मूलभूत व्यवस्था तक ठीक से नहीं दी जा रही, लेकिन दबाव पूरा बनाया जा रहा है।
3. SDM-तहसीलदार ने दी अनुमति — फिर नया मोड़:
मामला जब बढ़ा तो SDM और तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय व्यापारियों की बात सुनी, स्थल का निरीक्षण किया और दुकानें लगाने की अनुमति प्रदान कर दी।
व्यापारियों ने राहत की सांस ली, लगा अब त्योहार अच्छे से मनेगा।
लेकिन —
अनुमति के बाद अब नगर पालिका अध्यक्ष और कुछ पार्षदों की आपत्ति और नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। नगर पालिका अब फिर अपनी बात पर अड़ी है — “दुकानें हमारे मुताबिक दी जाएंगी।”
मौके पर क्या हुआ? — पंचनामा और जांच
मौके पर प्रशासन द्वारा दुकानों का पंचनामा तैयार किया गया।
SDM और तहसीलदार द्वारा दुकानदारों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए —
✅ पटाखा दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाए
✅ आग बुझाने के साधन — बालू, पानी, फायर एक्सटिंग्विशर अनिवार्य
✅ दुकान के पास धूम्रपान, खुली आग पूरी तरह प्रतिबंधित
✅ बच्चों को पटाखे बेचने में सावधानी
✅ बिजली के तारों से दूरी, सुरक्षित वायरिंग
स्थल पर सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है — सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
आम जनता का सवाल — त्योहार किसका?
आम जनता पूछ रही है —
त्योहार शुरू हो गया है, अब विवाद क्यों?
जब व्यापारी तैयार हैं, प्रशासन ने अनुमति दे दी, तो फिर लड़ाई क्यों?
लोगों का कहना है — जनप्रतिनिधि और व्यापारियों की लड़ाई में आम जनता और त्योहार पिस रहा है। अगर यही चलता रहा तो दीपावली की खुशियां विवाद की काली साया में दब जाएंगी।







