रिपोर्ट-खिलेश साहू
श्रीराम शिक्षण समिति द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर मड़ाईभाठा में छत्तीसगढ़ का पहला पारंपरिक पर्व हरेली तिहार सरस्वती शिशु मंदिर मड़ाईभाठा के भैया बहिन एवं आचार्य दीदीयो के द्वारा पूरे उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान से मनाया गया। इस अवसर पर कृषि कार्य में उपयोग होने वाले औजारों की विशेष पूजा-अर्चना की गई और गेड़ी दौड़ का भी आयोजन हुआ, जिसने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। पर्व के समापन पर छत्तीसगढ़ी पकवानों जैसे गुलगुल भजिया, अरसा, ठेठरी-खुरमी और शक्करपारा का प्रसाद वितरण किया गया। आगे श्री जितेन्द्र साहू (वरिष्ठ आचार्य) ने बताया कि हरेली कब से और क्यों मनाते हैं यह पर्व हरेली, जो हर साल श्रावण मास की अमावस्या को मनाया जाता है,छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण लोकपर्व है। यह पर्व प्राचीन काल से ही कृषि प्रधान समाज का अभिन्न अंग रहा है, जब मनुष्य ने खेती करना और पशुओं को पालना शुरू किया। यह वर्षा ऋतु की शुरुआत और खरीफ फसलों की बुवाई के बाद आता है, जब चारों ओर हरियाली छा जाती है। हरेली शब्द हरियाली से बना है, जो प्रकृति की समृद्धि और जीवन के नवसंचार का प्रतीक है।
इस दिन किसान अपनी मेहनत के बाद प्रकृति और कृषि उपकरणों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। वे अपने कृषि औजारों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं, पशुधन का सम्मान करते हैं और धरती माता से अच्छी फसल व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गेड़ी चढ़ने की परंपरा इस पर्व को और भी खास बनाती है, जो ग्रामीण संस्कृति और मनोरंजन का अभिन्न अंग है। यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश देता है। सामाजिक एकजुटता और खुशहाली की कामना की। आगे श्री अमन राव ने बताया कि हरेली पर्व अन्नदाताओं के अथक परिश्रम को समर्पित है। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिवार की ओर से किसान भाइयों सहित समस्त सामाजिकजनों और क्षेत्रवासियों के घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई। इस आयोजन में जितेन्द्र साहू, गिरीश पवार, अंगेश सेन, तोरण निर्मलकर, राजकुमार निर्मलकर, भगवती पवार, रेणुका साहू,चन्द्रकला साहू, नेहा गायकवाड़,नेमीन साहू,डिम्पल यदु,रितु साहू,घनेश्वरी साहू , सभी कक्षा के भैया बहन कार्यक्रम में उपस्थित हुए।









