रायपुर संवाददाता- रघुराज
पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट का दौर जारी है, जिसने निवेशकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। पिछले तीन कारोबारी दिनों में निवेशकों के करीब ₹13 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए हैं, जिससे बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। इस तीव्र गिरावट का मुख्य शिकार निफ्टी 50 इंडेक्स रहा है, जो 23 जुलाई के बंद स्तर से अब तक 550 अंकों से अधिक लुढ़क चुका है और अब 24,700 के नीचे कारोबार कर रहा है।
बाजार में यह मंदी का रुख साफ दिखाई दे रहा है, क्योंकि निफ्टी ने पिछले पांच में से चार कारोबारी दिनों में लाल निशान में कारोबार किया है। यह निवेशकों के लिए एक गंभीर संकेत है कि बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। सिर्फ निफ्टी ही नहीं, बल्कि बीएसई सेंसेक्स भी पिछले तीन दिनों में 1800 अंकों से अधिक लुढ़क चुका है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा है। सेंसेक्स और निफ्टी की यह गिरावट बाजार के समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
इस गिरावट का असर केवल सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। ये इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि बाजार की यह कमजोरी पूरे स्पेक्ट्रम में फैली हुई है। पिछले एक हफ्ते में, मिडकैप इंडेक्स 2% टूट चुका है जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 3.5% की भारी गिरावट दर्ज कर चुका है। यह छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि इन क्षेत्रों में गिरावट अक्सर अधिक तीव्र होती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारक हो सकते हैं, जिनमें वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, बढ़ती ब्याज दरें, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और घरेलू मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताएं शामिल हैं। निवेशक अब सतर्कता बरत रहे हैं और बाजार की दिशा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाजार कब तक इस बिकवाली के दबाव से उबर पाता है और क्या कोई सकारात्मक ट्रिगर इसे वापस ऊपर ला पाता है। फिलहाल, निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सावधानी बरतें और किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले गहन विश्लेषण करें।









