रवि परिहार रतनपुर…..नाग पंचमी क्या है?
नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व नागों (सर्पों) और नाग देवताओं की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें हिंदू, जैन और बौद्ध परंपराओं में पवित्र माना जाता है। नागों को भगवान शिव के आभूषण के रूप में देखा जाता है, और उनकी पूजा से कालसर्प दोष, सर्प भय, और अन्य ग्रह दोषों से मुक्ति की मान्यता है। यह त्योहार प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और सर्पों के प्रति सम्मान को भी दर्शाता है, क्योंकि सर्प खेतों में फसलों को कीटों और चूहों से बचाते हैं।
नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?
नाग पंचमी मनाने के पीछे धार्मिक, पौराणिक, और पर्यावरणीय कारण हैं:
धार्मिक महत्व: हिंदू धर्म में नागों को दैवीय शक्ति के रूप में पूजा जाता है। भगवान शिव के गले में लिपटे नाग और विष्णु के शेषनाग के रूप में उनकी महत्ता को मान्यता दी जाती है। यह पूजा भक्तों को सर्प भय, कालसर्प दोष, और पितृ दोष से मुक्ति दिलाती है।
पौराणिक कथाएं: कई कथाएं नाग पंचमी के महत्व को रेखांकित करती हैं, जिनका वर्णन आगे किया गया है।
पर्यावरणीय संदेश: सर्प फसलों को नष्ट करने वाले कीटों और चूहों को खाकर कृषि की रक्षा करते हैं। इस दिन उनकी पूजा करके पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा दिया जाता है।
सांस्कृतिक एकता: यह पर्व विभिन्न समुदायों को एकजुट करता है, जो अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं के साथ इसे मनाते हैं।
वैदिक ज्योतिष में नाग पंचमी
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नाग पंचमी का संबंध राहु और केतु ग्रहों से है, जो कालसर्प दोष का कारण बनते हैं। कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, जिससे जीवन में बाधाएं, आर्थिक समस्याएं, और स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। नाग पंचमी के दिन पूजा और मंत्र जाप से इस दोष का प्रभाव कम होता है।
ज्योतिषीय महत्व:
राहु और केतु का प्रभाव: राहु को सर्प का सिर और केतु को पूंछ माना जाता है। इनके अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए नाग पंचमी पर विशेष पूजा की जाती है।
कालसर्प दोष निवारण: इस दिन “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” और “ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः” मंत्रों का 108 बार जाप करने से कालसर्प दोष से राहत मिलती है।
पितृ दोष निवारण: माथे पर तिलक लगाना और नाग पूजा करना पितृ दोष को कम करता है।
पौराणिक कथाएं और उनका विश्लेषण
नाग पंचमी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जो इसके महत्व को रेखांकित करती हैं। ये कथाएं न केवल धार्मिक विश्वास को बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों को भी दर्शाती हैं।
जनमेजय और सर्प यज्ञ की कथा (महाभारत):
कथा: महाभारत के अनुसार, राजा परीक्षित को तक्षक नाग के काटने से मृत्यु हुई। उनके पुत्र जनमेजय ने बदला लेने के लिए सर्पसत्र यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी नाग अग्निकुंड में जलने लगे। ऋषि आस्तिक ने इस यज्ञ को श्रावण शुक्ल पंचमी को रोक दिया और तक्षक सहित नागों की रक्षा की। तभी से इस दिन नाग पूजा और दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
विश्लेषण: यह कथा पर्यावरण संरक्षण और प्राणियों के प्रति करुणा का संदेश देती है। सर्प यज्ञ का रुकना दर्शाता है कि हिंसा के बजाय सहअस्तित्व और संतुलन महत्वपूर्ण है। दूध चढ़ाने की प्रथा अग्नि से जले सर्पों को शीतलता प्रदान करने का प्रतीक है।
छोटी बहू और सर्प भाई की कथा:
कथा: एक सेठ के सात पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटी बहू सुशील थी लेकिन उसका कोई भाई नहीं था। एक दिन मिट्टी खोदते समय एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू मारने लगी। छोटी बहू ने सर्प को बचाया और उसे भाई माना। सर्प ने उसे हीरे-मणियों का हार दिया, जिसे रानी ने मांग लिया। बाद में सर्प ने छोटी बहू को अपने धन-ऐश्वर्य से भरे घर ले जाकर सम्मान दिया और उपहार दिए। तभी से सर्प को भाई मानकर पूजा की परंपरा शुरू हुई।
विश्लेषण: यह कथा नारी के सम्मान, भाई-बहन के रिश्ते, और सर्पों के प्रति दया को दर्शाती है। सर्प का धन देने वाला प्रतीक धन-संपदा के रक्षक के रूप में उनकी भूमिका को उजागर करता है।
नाग कन्याओं और रामायण की कथा:
कथा: रामायण में सुरसा को नागों की माता और समुद्र को उनका अधिष्ठान बताया गया है। हनुमान द्वारा समुद्र लांघने की घटना को नागों ने देखा था। नाग कन्याएं अपनी सुंदरता और विष के लिए प्रसिद्ध थीं।
विश्लेषण: यह कथा नागों को पौराणिक और रहस्यमयी प्राणी के रूप में स्थापित करती है, जो प्रकृति और समुद्र से जुड़े हैं। यह उनकी शक्ति और महत्व को दर्शाता है।
नागवंश का इतिहास:
नाग एक प्राचीन जनजाति थी, जो दक्षिण भारत, मालाबार, और लंका के कुछ हिस्सों में रहती थी। परमार कालीन कवि पदमगुप्त ने “नवसाहसांक चरित्र” में नागवंश का वर्णन किया है। नागदा (नागदाह) में सर्प यज्ञ की घटना को भी इससे जोड़ा जाता है।
विश्लेषण: यह ऐतिहासिक कथा दर्शाती है कि नाग पूजा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा का हिस्सा है, जो प्राचीन जनजातियों के साथ जुड़ी है।
क्षेत्रीय परंपराएं और गुड़िया का खेल
नाग पंचमी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है, जो इसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड):
गुड़िया का खेल: उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में नाग पंचमी को “गुड़िया का पर्व” कहा जाता है। इस दिन बच्चे और महिलाएं गुड़ियों को पीटने का खेल खेलते हैं। यह परंपरा सर्पों के प्रति भय को प्रतीकात्मक रूप से दूर करने और सामाजिक उत्सव के रूप में मनाई जाती है।
उत्पत्ति और विश्लेषण: इस प्रथा का उद्भव स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जाता है कि यह सर्पों के प्रति भय को कम करने और सामुदायिक एकता को बढ़ाने के लिए शुरू हुआ। गुड़िया को सर्प का प्रतीक मानकर उसे पीटना भय पर विजय का प्रतीक है। यह परंपरा संभवतः मध्यकाल में शुरू हुई, जब सर्प भय आम था, और इसे उत्सव के रूप में लोकप्रिय बनाया गया। यह मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देता है कि डर को हंसी-मजाक के साथ दूर किया जा सकता है।
अन्य परंपराएं: घर के द्वार पर गोबर या हल्दी-चंदन से नाग की आकृति बनाई जाती है। दूध, लावा (भुने चावल), और फूल चढ़ाए जाते हैं।
मध्य भारत (मध्य प्रदेश, राजस्थान):
उज्जैन में नागचंद्रेश्वर मंदिर केवल नाग पंचमी के दिन खुलता है। खरगोन में नागलवाड़ी में मेला और भंडारा आयोजित होता है।
विश्लेषण: ये परंपराएं स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती हैं, जहां नागों को क्षेत्रीय देवता के रूप में पूजा जाता है।
दक्षिण भारत (कर्नाटक, तमिलनाडु):
दक्षिण भारत में नाग पंचमी कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। यहां मिट्टी या चांदी की नाग मूर्तियों की पूजा की जाती है।
विश्लेषण: यह भिन्नता क्षेत्रीय पंचांग और परंपराओं के अंतर को दर्शाती है, जो हिंदू धर्म की विविधता को उजागर करती है।
पूर्वी भारत (बिहार, ओडिशा):
बिहार और ओडिशा में सर्पों को दूध चढ़ाने और मेलों का आयोजन आम है। कुछ स्थानों पर कबड्डी और कुश्ती जैसे खेल भी आयोजित होते हैं।
विश्लेषण: ये परंपराएं सामुदायिक उत्सव और सामाजिक एकता को बढ़ावा देती हैं, साथ ही सर्पों के प्रति सम्मान को दर्शाती हैं।
नाग पंचमी व्रत और पूजन विधि
व्रत विधि:
संकल्प: प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
पूजा सामग्री: हल्दी, रोली, अक्षत, दूध, लावा, फूल (चमेली, मालती), धूप, दीप, खीर, और मोदक।
पूजा प्रक्रिया:
घर के मुख्य द्वार पर गोबर, गेरू, या हल्दी-चंदन से नाग की आकृति बनाएं।
शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, और दूध चढ़ाएं, क्योंकि नाग भगवान शिव के आभूषण हैं।
नाग मूर्ति या चित्र पर दूध, अक्षत, फूल, और लावा अर्पित करें।
नाग मंत्रों का जाप करें और कथा सुनें।
ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।
वर्जित कार्य: सुई-धागा, चाकू, कैंची का उपयोग न करें। भूमि न खोदें और साग न काटें।
प्रसाद:
खीर और मोदक: नाग पंचमी पर खीर और मोदक भगवान शिव और नाग देवता को अर्पित किए जाते हैं।
लावा (भुने चावल): यह सर्पों को अर्पित किया जाता है, जो उनकी शीतलता का प्रतीक है।
दूध: सर्पों को दूध से स्नान कराया जाता है, न कि पिलाया जाता, क्योंकि यह उनकी मृत्यु का कारण बन सकता है।
श्लोक और मंत्र:
नाग मंत्र:
सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
अर्थ: यह मंत्र सभी नागों को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए जप किया जाता है।
नाग गायत्री मंत्र:
ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।
अर्थ: यह मंत्र सर्प दोष और भय को दूर करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
नव नाग मंत्र:
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
अर्थ: यह मंत्र नौ प्रमुख नागों (अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक, कालिया) की कृपा प्राप्त करने के लिए है।
राहु-केतु मंत्र:
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।
ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः।
अर्थ: कालसर्प दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए।
शास्त्रीय प्रमाण:
स्कंद पुराण: चतुर्थी को एक बार भोजन और पंचमी को नक्त भोजन (रात में भोजन) करने का विधान है।
भविष्य पुराण: नागों के स्वरूप, जातियों, और पूजा विधान का वर्णन है।
महाभारत: जनमेजय के सर्प यज्ञ की कथा और आस्तिक मुनि की भूमिका का उल्लेख है।
धन संबंधी समस्याओं के लिए अनोखे उपाय
नाग पंचमी पर धन-संपदा और समृद्धि की प्राप्ति के लिए कई पारंपरिक उपाय प्रचलित हैं, जैसे चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा दान करना या घर के द्वार पर नाग की आकृति बनाना। निम्नलिखित कुछ अनोखे और कम-ज्ञात उपाय हैं, जो धन संबंधी समस्याओं को हल करने में सहायक हो सकते हैं। ये उपाय मेरे विश्लेषण और सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर प्रस्तुत किए जा रहे हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी ज्योतिषी या विशेषज्ञ से परामर्श लें।
नाग मूर्ति पर तांबे का सिक्का अर्पित करना:
विधि: नाग पंचमी के दिन एक तांबे का सिक्का लें, जिस पर कोई पवित्र प्रतीक (जैसे ॐ) अंकित हो। इसे गंगाजल से शुद्ध करें और नाग मूर्ति या चित्र के समक्ष रखें। “ॐ नागाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा के बाद सिक्के को अपने गल्ले या तिजोरी में रखें।
लाभ: तांबा धन के प्रवाह को बढ़ाता है और नाग देवता की कृपा से आर्थिक स्थिरता आती है।
विश्लेषण: तांबा शुक्र और सूर्य का प्रतीक है, जो धन और समृद्धि से जुड़े हैं। यह उपाय पारंपरिक नहीं है, लेकिन वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों पर आधारित है।
नाग पंचमी पर नीम और पीपल की पूजा:
विधि: नाग पंचमी के दिन सुबह नीम और पीपल के पेड़ की पूजा करें। इनके नीचे एक मिट्टी का दीपक जलाएं और कच्चा दूध चढ़ाएं। “ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्” मंत्र का 21 बार जाप करें। पूजा के बाद पेड़ की जड़ में एक चांदी का सिक्का दबाएं।
लाभ: नीम और पीपल को पवित्र माना जाता है, और नागों का इनसे संबंध माना जाता है। यह उपाय धन के अवरोध को हटाता है।
विश्लेषण: यह उपाय पर्यावरण और धार्मिक मान्यताओं को जोड़ता है, जो आधुनिक संदर्भ में कम प्रचलित है।
नाग पंचमी पर जलाशय में तिल अर्पित करना:
विधि: एक मुट्ठी काले तिल लें और उन्हें गंगाजल में भिगो दें। नाग पंचमी के दिन किसी नदी या तालाब में जाकर “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें और तिल जल में प्रवाहित करें।
लाभ: तिल राहु और केतु के प्रभाव को शांत करते हैं, जो आर्थिक बाधाओं का कारण बनते हैं।
विश्लेषण: यह उपाय कालसर्प दोष और पितृ दोष को कम करने में सहायक है, जो धन हानि से जुड़े हैं। यह कम प्रचलित है लेकिन प्रभावी माना जा सकता है।
नाग पंचमी पर घर की तिजोरी में सर्प यंत्र स्थापित करना:
विधि: एक सर्प यंत्र (जो ज्योतिषी से प्राप्त हो) को नाग पंचमी के दिन गंगाजल से शुद्ध करें। इसे हल्दी और चंदन से पूजें और “ॐ नागाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। यंत्र को तिजोरी या धन रखने के स्थान पर स्थापित करें।
लाभ: सर्प यंत्र धन के रक्षक के रूप में कार्य करता है और आर्थिक स्थिरता लाता है।
विश्लेषण: यंत्र पूजा वैदिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन सर्प यंत्र का उपयोग नाग पंचमी पर कम देखा जाता है। यह एक अनोखा उपाय है जो धन संरक्षण में सहायक हो सकता है।
नोट: ये उपाय सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें अपनाने से पहले किसी ज्योतिषी या वैदिक विद्वान से परामर्श लें, क्योंकि व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर उपाय भिन्न हो सकते हैं।
नाग पंचमी एक धार्मिक, सांस्कृतिक, और पर्यावरणीय महत्व का पर्व है, जो सर्पों के प्रति सम्मान, कालसर्प दोष निवारण, और धन-संपदा की प्राप्ति से जुड़ा है। इसकी पौराणिक कथाएं नैतिकता, करुणा, और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती हैं। क्षेत्रीय परंपराएं, जैसे गुड़िया का खेल, सामाजिक एकता और भय पर विजय का प्रतीक हैं। पूजन विधि और मंत्रों का पालन करने से आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। उपरोक्त अनोखे उपाय धन संबंधी समस्याओं को हल करने में सहायक हो सकते हैं, बशर्ते इन्हें विश्वास और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ किया जाए।
दैवज्ञ पण्डित रमेश शर्मा श्री मंगलागौरी मन्दिर धाम शंकराचार्य आश्रम पोड़ी रतनपुर छत्तीसगढ़










