बिलासपुर संवाददाता – रौशनी सोनी
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित भरनी गांव में एक ऐसा स्थान है, जहां श्रद्धा और रहस्य एक साथ जीवित हैं — करिया महादेव मंदिर। यह मंदिर भगवान शिव के अनन्य भक्तों के लिए सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि आस्था, चमत्कार और परंपरा का जीवंत प्रतीक है।
करीब 500 वर्षों पुराना यह मंदिर अपने काले पत्थर के शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिसे श्रद्धालु “करिया महादेव” के नाम से पूजते हैं। मान्यता है कि यह शिवलिंग स्वयंभू और चमत्कारी है, जिसके दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

रहस्य से भरा इतिहास
मंदिर के इतिहास में एक रहस्यमयी घटना भी जुड़ी हुई है। स्थानीय कथा के अनुसार, कभी यहां नाग-नागिन का जोड़ा प्रकट हुआ था। जब उनकी मृत्यु हुई, तो मंदिर के पास स्थित सरोवर का पानी रक्तवर्ण हो गया। तभी से इस स्थान को रहस्यमयी शक्तियों का केंद्र माना जाने लगा।
मंदिर परिसर में स्थित एक गहरा छिद्र, जिसमें सालभर पानी भरा रहता है लेकिन कभी ऊपर नहीं आता — यह भी भक्तों के लिए अथाह जिज्ञासा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

तीन पीढ़ियों से सेवा
मंदिर के वर्तमान पुजारी पंडित उत्तम अवस्थी बताते हैं कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से इस मंदिर की सेवा कर रहा है। वे कहते हैं कि “यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों की साधना और गांव की सांस्कृतिक पहचान है।”
श्रद्धा का महासंगम
हर साल सावन के सोमवार, महाशिवरात्रि, और तोरण पर्व पर यहां हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। लोग छोटी नर्मदा नदी से जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठता है।









