नई दिल्ली – 26 अगस्त को भारतीय नौसेना के इतिहास में एक खास दिन दर्ज होने वाला है। पहली बार एक साथ दो अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट – आईएनएस उदयगिरि (F35) और आईएनएस हिमगिरि (F34) – नौसेना के बेड़े में शामिल होंगे। ये दोनों रडार को चकमा देने में सक्षम नेक्स्ट-जनरेशन वॉरशिप हैं, जो प्रोजेक्ट 17A के तहत स्वदेश में तैयार किए गए हैं।
आईएनएस उदयगिरि का निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स में हुआ है, जबकि हिमगिरि को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता ने तैयार किया है। खास बात यह है कि उदयगिरि नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो का 100वां डिजाइन किया गया पोत है। करीब 6,700 टन वजनी ये युद्धपोत शिवालिक क्लास से बड़े और तकनीकी रूप से ज्यादा उन्नत हैं।
बेहतरीन डिजाइन और घातक हथियारों से लैस
रडार से बचने वाला ढांचा – विशेष ‘रडार-अवशोषक’ सामग्री और कोणीय डिजाइन से दुश्मन के रडार पर पहचान मुश्किल।
लंबाई और वजन – 149 मीटर लंबा (करीब 15 मंजिला इमारत जितना), वजन लगभग 6,670 टन।
गति और रेंज – अधिकतम स्पीड 52 किमी/घंटा, एक बार ईंधन भरने पर 10,000 किमी से अधिक दूरी तय कर सकते हैं।
हेलिकॉप्टर ऑपरेशन – सी किंग हेलिकॉप्टर तैनात करने की क्षमता, जो पनडुब्बी और सतही जहाजों पर हमला कर सकते हैं।
मुख्य हथियार – ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (290+ किमी मारक क्षमता), आधुनिक तोपें, पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो और मिसाइलें।
रक्षा प्रणाली – आने वाली दुश्मन मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की क्षमता, उन्नत सोनार सिस्टम से गहरे पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम।
रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक
इन पोतों के निर्माण में 200 से अधिक भारतीय कंपनियों ने योगदान दिया, जिससे 4,000 से ज्यादा लोगों को सीधी और 10,000 से अधिक को अप्रत्यक्ष नौकरियां मिलीं। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम है।
भारत की समुद्री ताकत में इज़ाफा
इन फ्रिगेट्स के शामिल होने से भारत की अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में निगरानी क्षमता और बढ़ जाएगी। नौसेना अब मलक्का जलडमरूमध्य तक चीनी जहाजों और पनडुब्बियों की हलचल पर नजर रख सकेगी।
यह सिर्फ सामरिक बढ़त ही नहीं, बल्कि चीन और पाकिस्तान के लिए सीधा संदेश भी है। चीन हाल के वर्षों में श्रीलंका, मालदीव और अफ्रीकी तटों पर बंदरगाहों के जरिए हिंद महासागर में मौजूदगी बढ़ा रहा है, जबकि पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर उसकी गतिविधियां भारत के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
आगे की योजनाएं
नौसेना 2025 में और भी स्वदेशी पोतों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है, जिनमें विध्वंसक आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि, पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर, एएसडब्ल्यू शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला और डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार शामिल हैं।









