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बकावंड में शुरू हुआ पंचायत कार्यों का डिजिटलीकरण, लेकिन बड़ा सवाल – क्या क्यूआर कोड भ्रष्टाचार भी स्कैन करेगा?

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= बकावंड विकासखंड की सभी ग्राम पंचायतों में कार्यों का डिजिटलीकरण =
= क्यूआर कोड स्कैनर से मिलेगी पूरी जानकारी =
= भ्रष्टाचार का भी ब्यौरा मिल जाए तो बात बने =
-अर्जुन झा-
बकावंड। छत्तीसगढ़ और संभवतः पूरे में पहली बार किसी विकासखंड में सारे कार्यों की जानकारी क्यूआर कोड को स्कैन करते ही सेलफोन पर आ जाएगी। यह सौभाग्य मिला है बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड को। इस ब्लॉक की सभी 93 ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड सुविधा शुरू हो गई है। बस्तर जिला प्रशासन की यह पहल निसंदेह सराहनीय है, मगर यदि क्यूआर कोड स्कैन करते ही कार्यों में कितना भ्रष्टाचार हुआ है, यह जानकारी भी मिल जाए तो कोई बात बने।
छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की मनरेगा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित हो रही हैै। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड में इस योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए नई पहल की जा रही है। विकासखंड की सभी 93 पंचायतों में क्यूआर कोड आधारित नई प्रणाली शुरू की गई है। इसके जरिए ग्रामीण अपने गांव में पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत व्यक्तिगत और सामुदायिक कार्यों की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। स्मार्टफोन से क्यूआर कोड स्कैन करते ही कार्य का विवरण, व्यय और प्रगति जैसी सूचनाएं उपलब्ध होंगी। बकावंड विकासखंड में मनरेगा के लिए यह पहल केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया और राज्य सरकार की पारदर्शिता की नीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना और योजनाओं की निगरानी का अधिकार देना है। अब ग्रामीणों को जानकारी के लिए न तो पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और न ही अधूरी सूचनाओं पर निर्भर रहना होगा। सितंबर से बकावंड विकासखंड की सभी ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। यह प्रणाली न केवल समय और श्रम की बचत करेगी, बल्कि ग्रामीणों को तकनीकी रूप से सशक्त भी बनाएगी। पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग क्यूआर कोड का उपयोग कर सकें।

ग्रामीणों में भारी उत्साह
उल्लेखनीय है कि बकावंड को बस्तर जिले का सबसे शिक्षित और जागरूक विकासखंड माना जाता है। यहां ग्रामीणों में इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। पहले जानकारी के लिए लोगों को बार-बार दफ्तर जाना पड़ता था, अब क्यूआर कोड से सब कुछ तुरंत मिल जाएगा। यह लोगों लिए बहुत बड़ी सुविधा है।इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्रामीणों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा मिलेगा और सामुदायिक निगरानी मजबूत होगी। बस्तर जिला प्रशासन का विश्वास है कि यह पहल सूचना के लोकतंत्रीकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

ग्रामीणों का सवाल कायम
चूंकि बकावंड सबसे ज्यादा शिक्षित और कर्तव्यों के प्रति जागरूक नागरिकों वाला विकासखंड है, इसलिए यहां के लोगों के बीच सवाल तैर रहा है कि क्या क्यूआर कोड सिस्टम कार्यों में हुए भ्रष्टाचार की भी जानकारी उपलब्ध कराएगा? नागरिकों का कहना है कि विकासखंड की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है। डीएमएफटी, विधायक, सांसद निधि, बस्तर विकास प्राधिकरण समेत विभिन्न मदों की राशि से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों में खुलकर भ्रष्टाचार किया जाता है। 15वें वित्त की राशि की ऎसी बंदरबांट इस विकासखंड में इस कदर होती आई है कि कुछ पूछो मत। यहां के नागरिकों का कहना है कि क्यूआर कोड स्कैन करने से ऐसे कृत्यों का भी खुलासा होना चाहिए।

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