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किन्नरों की अदभूत देवी आराधना; सोलह श्रृंगार कर पहुंचीं मंदिर में, गाए भजन, उतारी आरती और माता को चढ़ाई चुनरी

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-जगदलपुर में दशकों पुरानी है यह परंपरा 

-आईजी, कलेक्टर, एसपी भी बने परंपरा के साक्षी 

अर्जुन झा/जगदलपुर। बस्तर दशहरा जहां अपनी समृद्ध विरासत, रोमांचक रस्मों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं बस्तर दशहरा की शुरुआत और नवरात्रि के पूर्व किन्नर समुदाय की एक परंपरा भी कम रोमांचक और विसमयकारी नहीं है।सोलह श्रृंगार किए किन्नरों का समूह जब जगदलपुर स्थित देवी दंतेश्वरी के मंदिर में पहुंचा तो वहां अद्भुत दृश्य बन गया। किन्नरों ने देवी की महिमा का बखान करते हुए भजन गाए और देवी की आरती उतारी। किन्नरों की इस परंपरा और रिवाज के साक्षी बस्तर रेंज के आईजी सुंदर राज पी., कलेक्टर हरिस एस. और एसपी शलभ सिन्हा भी साक्षी बने। इस दौरान मंदिर परिसर के आसपास तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

बस्तर बहुचरा किन्नर समाज सेवा प्राधिकरण जगदलपुर के संयोजन में पिछले कुछ दशकों से यहां शोभायात्रा निकाल कर माता दंतेश्वरी को चुनरी चढ़ाने की परंपरा शुरू की गई है। इसमें बस्तर संभाग सहित आसपास के जिलों के किन्नर भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी बीती रात्रि किन्नरों के अलग अलग संगठनों ने चुनरी यात्राएं निकाली और लगभग एक ही समय पर सभी संगठनों के किन्नर मंदिर पहुंच गए।

सात घोड़ों के रथ पर सवार किन्नर भजनों पर नाचते नजर आए। नगर की कुछ बच्चियां भी नाचती झुमती दिखीं। किन्नर चुनरी, फूलों और पूजा सामग्री से भरी टोकरियां सिर पर रखकर मंदिर पहुंचे थे। चुनरी शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करती हुई दंतेश्वरी माई के मंदिर पहुंची। वहां हर हर महादेव, जय मातादी, जय श्रीराम, राधे राधे, जय सिया राम के जयकारे लगाते हुए किन्नरों ने दंतेश्वरी माता को चुनरी चढ़ाई। इस दौरान सोने के गहनों से लदे, सजे, संवरे किन्नरों ने माता की महिमा पर आधारित भजन गए, ठुमके लगाए और मातारानी की आरती उतारी। इस दौरान सैकड़ों महिलाएं भी मंदिर परिसर में उपस्थित थीं। युवतियां इस नजारे को अपने मोबाइल फोन के कैमरों में कैद करती रहीं।जबरदस्त पुलिस व्यवस्था मौजूद रही। बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह, आईजी सुंदर राज पी., कलेक्टर हरिस एस., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा और अन्य अधिकारी मंदिर के बाहर खड़े रहकर यह रस्मो रिवाज देखते रहे। कलेक्टर अपने बेटे को लेकर पहुंचे थे। बताते हैं कि बस्तर के किन्नर हर साल नवरात्रि आरंभ की पूर्व संध्या चुनरी यात्रा निकलते हैं और पूरी नवरात्रि के दौरान मातारानी की आराधना में लीन रहते हैं।

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