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बस्तर दशहरा रथ पर सवारी की परंपरा पुनर्जीवित करने की मांग जनता की: कमलचंद्र भंजदेव

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

मैं नहीं, बस्तर की जनता चाहती है दशहरा रथ पर राजा बैठे: भंजदेव 
 राज परिवार के सदस्य ने पहली बार मीडिया के सामने रखी अपनी बात
जगदलपुर। बस्तर दशहरा के रथ पर बस्तर राज परिवार के सदस्य को बिठाने की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। इस बीच पहली बार मीडिया से चर्चा करते हुए राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने स्पष्ट रूप से कहा कि दशहरा रथ में बैठना उनकी मांग नहीं है। बस्तर की जनता चाहती है कि परंपरा अनुसार राज परिवार का सदस्य दशहरा रथ पर माई जी का छत्र लेकर सवार हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राजनीति को दरकिनार करते हुए बस्तरवासियों की भावनाओं के अनुरूप उचित निर्णय लेगी, ताकि हम मां दंतेश्वरी की सेवा और परंपरा का निर्वहन कर सकें।
शारदीय नवरात्र के प्रथम दिवस मां दंतेश्वरी मंदिर में जोत प्रज्वलित करने पहुंचे बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा है कि बस्तर राजाओं की दशहरा रथ पर बैठने की परंपरा रही है, चूंकि बस्तर राजाओं को रथपति की उपाधि मिली हुई है इसलिए बस्तर से यह मांग बहुत उठ रही है। यह मांग मेरी नहीं है, यह जनता की तरफ से उठ रही है। मांझी, मुखिया, चालकी, पुजारी और पटेलों की तरफ से मांग उठ रही है। मेरे पास उनके हजारों एप्लीकेशंस हैं। अब निर्णय यह है कि हम सब चाहते हैं की लड़ाई- झगड़ा न हो। वही परंपरा चालू करेंगे जो 600 साल से चली आ रही है। जो तत्कालीन महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव महाराज की हत्या के बाद बंद कर दी गई थी। उसे पुनः जागृत किया जाए। यह मांग बस्तरवासियों की है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इसमें सरकार संवेदनशील होकर और राजनीति को परे रखते हुए तथा विभिन्न समाज व आदिवासी समाज का सम्मान करते हुए निर्णय लेगी और जो परंपरा है। उसका निर्वहन करने की अनुमति देगी, ताकि हम भी मां दंतेश्वरी की सेवा और परंपरा का निर्वहन कर सकें।

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