कोंडागांव के आदिवासी गर्ल्स हॉस्टल में हुई घटना; परिजन आरोप लगा रहे हैं कि प्रबंधन ने मामले की सच्चाई छुपाई या गुमराह किया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
कोंडागांव — जिले के एक आदिवासी गर्ल्स हॉस्टल से शनिचर को सुबह पांचवीं कक्षा की एक छात्रा की लाश हॉस्टल की खिड़की से लटकी हुई मिली। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और अस्पताल कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे। प्राथमिक निरीक्षण में छात्रा की मौत टाई से घुटन देने के कारण बताई जा रही है, हालांकि पुलिस ने पोस्टमार्टम और स्थिति की विस्तृत जांच का हवाला दिया है।
घटना के बाद परिजन और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। छात्रा के परिवार का कहना है कि हॉस्टल प्रबंधन ने पहला वक्तव्य देते हुए कुछ अलग जानकारी दी, जिससे परिजन असमंजस में हैं। परिवारियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरी सच्चाई सार्वजनिक की जाए और यदि कोई लापरवाही या गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पुलिस अधिकारीयों ने बताया कि मामला आत्महत्या जैसा दिखाई दे रहा है, पर मरने की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मामले से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस ने हॉस्टल के स्टाफ और छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं तथा CCTV फुटेज और अन्य सबूत जुटाने के प्रयास जारी हैं। यदि किसी तरह का अपराध या दबाव पाया जाता है तो मामले के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हॉस्टल के प्रबंधन की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ है या उन्होंने जो बयान दिया वह परिजनों को संतोषजनक नहीं लगा। स्थानीय प्रशासन ने भी कहा है कि उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच में प्रकटीकरण के समय पर पारदर्शिता रखी जाएगी।
बैकग्राउंड और जांच के मोड़
प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार छात्रा कक्षा पाँच में पढ़ती थी और हॉस्टल में रहती थी। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी ने हाल ही में किसी तरह की मन:स्थिति बदलने वाली बातें नहीं कही थीं।
पुलिस ने आसपास के अन्य छात्रों और स्टाफ के बयान दर्ज कर लिए हैं; किसी भी तरह के दबाव, उत्पीड़न या विवाद के संकेत मिलने पर जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की निश्चित वजह का खुलासा संभव होगा — मृत्यु स्वाभाविक, आत्महत्या, या किसी अपराध के कारण हुई, यह पोस्टमार्टम व साक्ष्य आधारित जांच तय करेगी।
घटना ने स्थानीय समुदाय में नाराजगी और चिंता पैदा कर दी है। परिवार चाहते हैं कि जांच त्वरित और पारदर्शी हो तथा किसी भी तरह की लापरवाही की सख्त सज़ा दी जाए। प्राधिकरणों ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया है कि सच सामने लाया जाएगा और जरूरत पड़ी तो उच्च अफसरों को भी जांच में जोड़ा जाएगा।









