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धनतेरस: समृद्धि, आरोग्य और शुभता का प्रतीक पर्व

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धनतेरस, दीपावली महापर्व की शुभ शुरुआत का प्रथम दिन होता है, जिसे त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। संस्कृत में ‘धन’ का अर्थ है संपत्ति और ‘तेरस’ का मतलब तेरहवीं तिथि। यह दिन देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की आराधना के लिए समर्पित होता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। इसलिए यह दिन स्वास्थ्य और आयु की कामना का भी प्रतीक माना जाता है। धनतेरस पर बर्तन, धातु, इलेक्ट्रॉनिक सामान या आभूषण खरीदने की परंपरा है। इसे शुभ और समृद्ध भविष्य का संकेत माना जाता है।

धनतेरस पर लोग अपने घरों और कार्यालयों की साफ-सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और शाम के समय देवी लक्ष्मी एवं भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। विशेषकर व्यापारी वर्ग इस दिन को अत्यंत शुभ मानता है और अपने नए बही-खाते की शुरुआत करता है।

इस वर्ष भी धनतेरस को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाने की तैयारी की जा रही है। बाजारों में रौनक लौट आई है, लोग स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना के साथ पूजन और खरीदारी में जुटे हैं।

धनतेरस के दिन यह करें:
– शाम को दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार और तुलसी चौरा में रखें
– चांदी, स्टील या तांबे का बर्तन खरीदें
– भगवान धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करें
– स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक दवाएं या फिटनेस संबंधित सामान खरीदना भी शुभ माना जाता है

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