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ट्रम्प ने कराया थाईलैंड–कंबोडिया शांति समझौता, कहा – “हमने असंभव को संभव किया”

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कुआलालंपुर (मलेशिया)
दक्षिण-पूर्व एशिया की राजनीति में शनिवार को इतिहास रचने वाला दिन रहा, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मौजूदगी में थाईलैंड और कंबोडिया ने शांति और सीमावर्ती संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित ASEAN शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ।
समझौते के बाद ट्रम्प ने कहा —
> “हमने उस चीज़ को संभव किया जिसे दुनिया असंभव मान रही थी। जब संवाद और विश्वास एक साथ चलते हैं, तब युद्ध भी शांत हो जाते हैं।”
 वर्षों पुराने विवाद पर लगा विराम
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लगभग 800 किलोमीटर लंबी सीमा पर पिछले कई दशकों से झड़पें होती रही हैं। जुलाई 2025 में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई मुठभेड़ों में कई लोग मारे गए थे और हजारों ग्रामीणों को पलायन करना पड़ा था।
इसी के बाद मलेशिया ने मध्यस्थता की पहल की थी, जिसमें ट्रम्प की कूटनीतिक भूमिका भी अहम रही।
समझौते के तहत दोनों देशों ने सीमावर्ती इलाकों से भारी हथियार हटाने, संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने, और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा, “यह सिर्फ एक कागज़ पर दस्तखत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए स्थायी शांति की शुरुआत है।”
 ट्रम्प बने ‘शांतिदूत’
समारोह में ट्रम्प के पहुँचते ही माहौल उत्साहपूर्ण हो गया। मंच पर उन्होंने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के हाथ एक साथ मिलाए और कैमरे की ओर देखकर कहा —
> “अमेरिका हमेशा शांति के साथ है, न कि युद्ध के साथ।”
कार्यक्रम के बाद जब वे मलेशिया के सांस्कृतिक समारोह में पहुँचे, तो उन्होंने पारंपरिक कलाकारों के साथ मंच पर थिरकते हुए डांस भी किया। सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें ट्रम्प स्थानीय ढोलक की ताल पर मुस्कराते हुए झूमते नजर आ रहे हैं।
 समझौते के मुख्य बिंदु
दोनों देशों के बीच सीमा क्षेत्र में संयुक्त मॉनिटरिंग फोर्स बनाई जाएगी।
विस्थापित परिवारों को चरणबद्ध तरीके से वापस बसाया जाएगा।
सीमा से भारी हथियार व माइंस हटाई जाएंगी।
सांस्कृतिक और व्यापारिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समझौता संयुक्त राष्ट्र की सीधी भूमिका के बिना कराया गया है। ट्रम्प ने मजाकिया लहजे में कहा,
> “यूएन ने इसमें हिस्सा नहीं लिया, और यही वजह है कि हमने इतनी जल्दी सफलता पाई।”
 विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक इसे ट्रम्प की “री-एंट्री कूटनीति” कह रहे हैं। वे इसे अमेरिकी प्रभाव वापस स्थापित करने का प्रयास मानते हैं, खासकर तब जब चीन दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प की भूमिका प्रतीकात्मक रही और असली कूटनीतिक पहल मलेशिया और ASEAN देशों की थी।
शांति की राह पर उम्मीद
थाईलैंड के प्रधानमंत्री चान ओचा ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के नागरिकों के लिए “नए सवेरे की शुरुआत” है। वहीं, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मनैट ने कहा कि “सीमा अब तनाव का नहीं, व्यापार और सहयोग का प्रतीक बनेगी।”
 मलयेशिया में मिला गर्मजोशी भरा स्वागत
कुआलालंपुर पहुंचने पर ट्रम्प का स्वागत पारंपरिक नर्तकों और कलाकारों ने किया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, उन्होंने करीब 15 मिनट तक सांस्कृतिक प्रस्तुति देखी और खुद भी पारंपरिक नृत्य में शामिल हो गए।
कार्यक्रम के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा —
> “शांति के नाम पर नाचना, इससे बड़ा उत्सव कोई नहीं।”
थाईलैंड–कंबोडिया शांति समझौता दक्षिण-पूर्व एशिया के इतिहास का नया अध्याय है।
मलेशिया की मध्यस्थता और ट्रम्प की उपस्थिति ने इसे विश्व मंच पर एक बड़ा कूटनीतिक क्षण बना दिया। अब दुनिया की नज़रें इस बात पर हैं कि क्या यह समझौता वास्तविक शांति में तब्दील होता है, या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा।

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