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अमेरिका-ईरान टकराव फिर भड़का: अमेरिकी हवाई हमलों के बाद बहरीन स्थित अमेरिकी बेस पर ईरान का जवाबी हमला

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हेलिकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में की गई। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इसे “सीमित और अनुपातिक जवाब” बताया है, जबकि ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है।

ईरान ने बहरीन समेत कई अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। बहरीन में स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय के आसपास धमाकों और अलर्ट सायरनों की खबरें सामने आईं। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया और अमेरिकी सैनिकों को बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

किन ठिकानों पर हुआ अमेरिकी हमला?
अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों में स्थित रडार, निगरानी केंद्रों और वायु रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। कुछ रिपोर्टों में ईरान के सिरिक क्षेत्र में जल अवसंरचना को नुकसान पहुंचने का भी दावा किया गया है।

कैसे शुरू हुआ नया विवाद?
तनाव तब बढ़ा जब होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया कि हेलिकॉप्टर को ईरान समर्थित कार्रवाई में निशाना बनाया गया था। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जवाबी सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दी। अमेरिका का कहना है कि उसके दोनों पायलट सुरक्षित बचा लिए गए थे।

युद्धविराम पर मंडराया खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि अप्रैल में हुए संघर्षविराम के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य टकराव है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच पहले से परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
संघर्ष बढ़ने के साथ ही वैश्विक तेल बाजार में भी चिंता बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई और निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

क्षेत्रीय युद्ध की आशंका
ईरान और अमेरिका दोनों ने फिलहाल पूर्ण युद्ध से बचने की बात कही है, लेकिन लगातार हो रहे हमले और जवाबी कार्रवाई संकेत दे रहे हैं कि हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यदि तनाव और बढ़ता है तो पूरा खाड़ी क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की चपेट में आ सकता है।

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