बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
बच्चों को असली-नकली पनीर का भेद जानने की विधि सिखाई व्याख्याता स्पंदन ने
शिक्षा के साथ जागरूकता की भी बेहतरीन पहल
जगदलपुर। बस्तर जिले के सरकारी स्कूलों में अब पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा के साथ साथ नैतिकता, संस्कारों की भी शिक्षा बच्चों को दी जाने लगी है। यही नहीं विज्ञान के प्रयोगों के जरिए विद्यार्थियों को जागरूक भी किया जाने लगा है। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर कश्यप के मार्गदर्शन में सरकारी स्कूल नित नए आयाम गढ़ रहे हैं। इसी क्रम में सेजस स्कूल अलनार की केमिस्ट्री लैब में विज्ञान की व्याख्याता स्पंदन पाराशर द्वारा छात्रों को एक उपयोगी और ज्ञानवर्धक प्रयोग कराया गया। आयोडीन टेस्ट से असली और नकली पनीर की पहचान करने की विधि बच्चों को स्पंदन पाराशर ने सिखाई।

इस प्रयोग में व्याख्याता स्पंदन पाराशर ने स्वयं विभिन्न पनीर नमूनों पर आयोडीन टेस्ट करते हुए छात्रों को बताया कि आयोडीन डालने से मिलावटी पनीर में स्टार्च की मौजूदगी से नीला-काला रंग बनता है, जबकि शुद्ध पनीर में कोई रंग परिवर्तन नहीं होता। इस प्रक्रिया को बच्चों ने ध्यानपूर्वक देखा और समझा कि कैसे एक साधारण वैज्ञानिक तरीका रोजमर्रा के जीवन में खाद्य पदार्थों की शुद्धता पहचानने में मदद कर सकता है। लेक्चरर स्पंदन पाराशर ने छात्रों को समझाया कि नकली या मिलावटी पनीर का सेवन शरीर के लिए हानिकारक होता है। इसमें मौजूद स्टार्च और सिंथेटिक तत्व पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं, गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ाते हैं, लीवर पर असर डालते हैं और बच्चों में पोषण की कमी पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “विज्ञान हमें न केवल प्रयोगों की समझ देता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि सेहतमंद जीवन के लिए सही निर्णय कैसे लिए जाएं।” प्रयोग देखकर छात्र बेहद उत्साहित नज़र आए। उन्होंने कहा कि यह गतिविधि उन्हें बहुत रोचक लगी क्योंकि इससे उन्हें यह समझने का मौका मिला कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा हुआ है। स्कूल प्रबंधन ने व्याख्याता स्पंदन पाराशर के इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयोग छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वास्थ्य जागरूकता और सीखने की जिज्ञासा को प्रोत्साहित करते हैं।









