अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि इस साल साउथ अफ्रीका में होने वाले ग्रुप ऑफ 20 यानी कि G-20 समिट में अमेरिका की तरफ से कोई सरकारी अफसर नहीं जाएगा। उन्होंने अपने इस फैसले की मुख्य वजह साउथ अफ्रीका में श्वेत किसानों के साथ हो रहे बर्ताव को बताया। ट्रंप ने पहले ही कह दिया था कि वह खुद इस सालाना समिट में नहीं जाएंगे, जहां दुनिया की बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष इकट्ठा होते हैं। उनकी जगह समिट में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जाने वाले थे, लेकिन वेंस के प्लान से वाकिफ एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब वेंस भी साउथ अफ्रीका की यात्रा नहीं करेंगे।
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘यह पूरी तरह शर्म की बात है कि G20 का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में हो रहा है।’ अपने पोस्ट में ट्रंप ने अफ्रीकनर (श्वेत किसान समुदाय) पर हो रहे ज़ुल्म का ज़िक्र किया, जिसमें हिंसा, मौतें और उनकी जमीन व खेतों की ज़ब्ती शामिल है। ट्रंप प्रशासन लंबे वक्त से दक्षिण अफ्रीकी सरकार पर आरोप लगाता रहा है कि वह अल्पसंख्यक श्वेत अफ्रीकानर किसानों को सताने और और उन पर हमलों की इजाजत दे रही है। अमेरिका ने हर साल आने वाले शरणार्थियों की संख्या को 7500 तक सीमित कर दिया है और कहा है कि इनमें ज्यादातर श्वेत दक्षिण अफ्रीकी होंगे, जिन्हें अपने देश में भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, दक्षिण अफ्रीका की सरकार इन आरोपों से हैरान है। उसका कहना है कि श्वेत लोग देश में आम तौर पर अश्वेत निवासियों से कहीं बेहतर जिंदगी जीते हैं, भले ही रंगभेद व्यवस्था को खत्म हुए 30 साल से ज्यादा हो गए हों। देश के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा है कि उन्होंने ट्रंप को बताया कि अफ्रीकनरों पर भेदभाव और अत्याचार की खबरें ‘पूरी तरह झूठी हैं।’ इस हफ्ते मियामी में एक भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका को G20 से बाहर फेंक देना चाहिए। इस साल की शुरुआत में विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने विदेश मंत्रियों की G20 मीटिंग का बहिष्कार किया था, क्योंकि उसका एजेंडा विविधता, समावेश और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर केंद्रित था।







