विवाह पंचमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, जो भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की स्मृति में हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व न केवल दिव्य प्रेम और आदर्श गृहस्थ जीवन का प्रतीक है, बल्कि पारिवारिक मूल्यों, नारी सम्मान और मर्यादा के आदर्शों को भी उजागर करता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मिथिला नगरी में इसी दिन राजा जनक की पुत्री सीता और अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम का विधिवत विवाह संपन्न हुआ था। जनकपुरी और अयोध्या सहित देशभर के राम मंदिरों में इस दिन भव्य आयोजन होते हैं। विशेष रूप से जनकपुर (नेपाल) में राम-सीता विवाह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जहां बारात की झांकी और विवाह संस्कारों का जीवंत मंचन किया जाता है।
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं और भगवान श्रीराम व माता सीता के चरणों में अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
विवाह पंचमी का पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में धर्म, समर्पण और मर्यादा के साथ रिश्तों को निभाना ही सच्चे अर्थों में विवाह का उद्देश्य होता है।









