Home कोंडागांव धर्मांतरण का सुनियोजित जाल: प्रेम, प्रार्थना और फिर पहचान छीनने की रणनीति

धर्मांतरण का सुनियोजित जाल: प्रेम, प्रार्थना और फिर पहचान छीनने की रणनीति

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केशकाल संवाददाता : विनीत पिल्लई

बड़े तेवड़ा -आमाबेडा की घटित घटना अति विडम्बना एवं दुर्भाग्यपूर्ण तथा चिंता जनक है ।
5वीं अनुसूची क्षेत्र घोषित शांत सुंदर वनांचल में घटित इस घटना के मुख्य सूत्रधार स्थानीय लोग नहीं बल्कि बाहर वाले ही रहे जिनके करे धरे का कलंक और तन -मन में लगे चोट तथा थाना – पुलिस, कोर्ट – कचहरी – पेशी एवं फैसले तक का चक्कर दर चक्कर ” घनचक्कर” उन्हें आर्थिक तौर पर जो आघात् पहुंचायेगा उससे उबर पाना आसान नहीं होगा…..

 घटना के मुख्य जनक ………

मतांतरण -धर्मातरंण कराने का एक मात्र काम धंधा करने वालें पहले बहुत ही प्रेम एवं नम्रता पूर्वक लोगों से प्रेम व्यवहार मेल जोड़ बढ़ाते हैं फिर उनके हितैषी होने का स्वांग करते उनका दुख तकलीफ बिमारी पता लगाते हैं । ज्यौं ही आगे वाला उनकी चिकनी चुपड़ी मिठी मिठी बात में शिकार आ जाता है तब उसे प्रार्थना सभा में आने को कहता है ।
प्रार्थना सभा में उसे समझाया जाता है की तूम जिस भी देवी देवता भगवान को मानते हो सब बेकार है हमारा ” सादा सबसे ज्यादा” पावरफूल भगवान है जो सब दुख तकलीफ बिमारी को दूर कर देता है ….

इसके तुरंत बाद उसे अपने देवी देवता का पूजा पाठ करना प्रसाद खाना बंद कर देने की समझाईश देते हुए गांव के लोगों की बात न मानने गांव के सामूहिक काम रीति रिवाज पूजा पाठ संस्कार में न जाने के लिए उकसाया जाता है …
इसके बाद गांव की एकता भाईचारा सद् भावना बिखरने लगता है । झांसे में आकर अपने घर परिवार समाज और गांव वालों से खुद को अलग थलग कर लेने वाला अपना ग्रुप (संख्या) बढ़ाने के लिए अन्य बिमारी से ग्रसीत दुखीत लोगों को प्रार्थना सभा में जाने के लिए उकसाने में जुट जाता है …!
धीरे धीरे इसी तरह से विस्तार का क्रम चलते रहता है …

परिवार में गांव में जब बाहर का ब्यक्ति जो मतांतरण धर्मांतरण का ही काम धंधा करता है उसके आने पर और लोगों से मिलने जुलने पर घर परिवार समाज और गांव के लोग ध्यान नहीं देते जिसके चलते देखते ही देखते गांव में मतांतरण/धर्मांतरण करने वालों की संख्या बढ़ते जाता है और गांव में गांव के लोगों का खुल्लमखुल्ला विरोध करने वाला गुट तैयार हो जाता है ।

पिछले वर्ष नारायणपुर में और 2025के अंतिम माह में आमाबेड़ा क्षेत्र में जो उग्रता जो बलबा मारपीट दंगा फसाद हुआ इसके मूल में जाने से यही पता चलेगा की ऐ आग बाहर से आने वाले उन लोगों ने बड़े प्रेम से परोसा जो बहुत मिठी मिठी बात किया करते थे । अपने ही घर परिवार रिश्तेदार जाति समाज गांव और धर्म के खिलाफ भड़काकर उन्हें हिंसक बना देने का काम बड़े प्रेम से बाहर से आने वालों ने किया ।

आमाबेड़ा की घटना महज एक संकेत है भविष्य में उत्पन्न होने वाले बहुत ही विषय स्थिति परिस्थिति का । समय रहते अगर आदिवासी समाज पिछड़ा वर्ग समाज हिंदू समाज (सर्व समाज) और शासन – प्रशासन – पुलिस ने बहुत गंभीरता से चिंतन मनन करते ठोस कदम न उठाया तो चल रहे मतांतरण -धर्मातरंण के चलते भविष्य में नक्सलवाद से भी गंभीर खतरनाक स्थिति परिस्थिति उत्पन्न हो जाएगा । और सरकार की पुलिस अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित होने के बावजूद कुछ नहीं कर पायेगी जैसा बड़े तेवड़ा में ढेला पत्थर डंडा की मार खाते हुए भी नहीं कर पाई और सहती रही बस सहती रही आत्मरक्षार्थ भी हांथ में मौजूद हथियार का उपयोग नहीं कर पाई ।

क्योंकि पुलिस अपने कर्तव्य और आदेश से बंधी थी , अगर पुलिस गोली चला देती और लोग मर जाते तो पुलिस पर और सरकार पर जोर ज़ुल्म ज्यादति करने और जान ले लेने का कलंक लग जाता ।
मिडिया चीख चीखकर पुलिस और सरकार को कटघरे में खड़ा कर देती और विपक्षी पार्टी के नेता छाती पीट पीटकर घड़ियाली आंसू बहाते पब्लिक को समाज को भड़काने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती …..
जबकि मतांतरित धर्मांतरित लोगों को कांग्रेस एवं विपक्षी पार्टी अपना पक्का वोट बैंक मानती है जिससे इनकार भी नहीं किया जा सकता।

आमाबेड़ा तेवड़ा की घटना को उग्रता की आग में झोंकने की क्रिया मतांतरित धर्मांतरित लोगों ने किया जिसकी प्रतिक्रिया बतौर झगड़ा लड़ाई मारपीट तोड़फोड़ आगजनी हुई ।

बाहर से पहुंचकर अगर गांव वालों पर हमला करके मारपीट नहीं किया गया होता तो जो हुआ वो न हुआ होता और जैसे अक्सर मतांतरित धर्मांतरित के मृत्यु के बाद थोड़ा बहुत वाद विवाद होकर अंततः सुलझ गया होता ।
बस्तर को नक्सलवाद के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए दृढ़संकल्पित होकर प्रयासरत छत्तीसगढ़ की सरकार एवं केंद्र की सरकार को बहुत ही योजना बद्ध ढंग से शांत बस्तर में मतांतरण धर्मांतरण के नाम से गांव के अमन चैन शांति सद भावना भाईचारा एकता में खटास पैदा गांव गांव में उपजाऐ जा रहे गुटबंदी और तनाव को जड़ मूल से खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए नहीं तो भविष्य में आमाबेड़ा तेवड़ा जैसे अप्रिय अवांछनीय स्थिति परिस्थिति उत्पन्न होने से कोई रोक नहीं पायेगा ।

सरकार से ज्यादा गंभीरता से हर गांव और हर समाज के लोगों को भी अब सचेत हो जाने की जरूरत है तथा अपने परिवार समाज एवं गांव वालों को अपने जाति समाज धर्म देवी देवता पूजा पाठ रूढ़ीवादी रीति-रिवाज परम्परा को छोड़कर कोई बाहर वालों के चक्कर में अपने से बाहर जाकर बाद में अपना ही विरोधी और शत्रु न बन जाए इसकी तरफ बहुत गंभीरता से पहल प्रयास करना चाहिए….
भविष्य में फिर से कहीं पर भी तेवड़ा आमाबेड़ा जैसी घटना न हो इसका ख्याल रखते ऐहतियातन ईमानदारी पूर्वक चिंतन मनन करते कोशिश करना जरूरी है…

 मतांतरण/धर्मांतरण करने के कारंण को ही समाप्त करने जरूरत 

बड़े तेवड़ा -आमाबेडा के घटना का ग्राउंड रिपोर्ट करते हुए आई बी सी के पत्रकार ने जब एक मतांतरित धर्मांतरित महिला से आन कैमरा पूछा तो उसने यह कहा कि – मैं भगवान कृष्ण की भक्त थीं पर मेरी तबियत खराब हुई तब मैं प्रार्थना करने जाने लगी और फिर ईशु को मानने लगी , मेरी ही तरह सरपंच परिवार के लोग भी बच्चे की तबियत खराब रहने के कारण प्रार्थना सभा में जाना चालू किए और मतांतरित धर्मांतरित हो गये ….
महिला ने जो बताया वह मतांतरण धर्मांतरण का मुख्य कारण और मुख्य आधार बनता है ।

95%से अधिक लोग बिमारी से ग्रस्त होने पर प्रार्थना सभा में जाना चालू करते हैं और फिर वो वापस लौटते नहीं। उनका ऐसा ब्रेनवाश किया जाता है कि वो अपने परिवार रिश्तेदार जाति समाज को छोड़ देता है गांव वालों को छोड़ देता है पर बाहर के उन लोगों का सांथ और उनके द्वारा पकड़ाया हुआ हांथ नहीं छोड़ पाता ….
सरकार को अपने स्वास्थ्य सुविधा को इतना सुलभ और भरोसेमंद बनाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी बिमार को प्रार्थना सभा जाना ही न पड़े

 विरोध करने की नौबत आए इसके पूर्व सांथ देना आरंभ करने की जरूरत —

बड़े तेवड़ा -आमाबेडा की महिला से जब आई बी सी के रिपोर्टर ने मतांतरित धर्मांतरित महिला से आन कैमरा पूछा तो महिला ने हकिकत का खुलासा करते हुए बताया कि – मतांतरण धर्मांतरण करने के बाद जो लोग विरोध करते हैं वो दुख तकलीफ पड़ने पर हांथ नहीं देते ….

यह दुखद सत्य है कि – सक्षम लोग और अपने ही लोग अपनों का तथा अपने आसपास के दिन दुखी गरीब उपेक्षित बिमारी से ग्रसीत लोगों का हांथ नहीं देते सहयोग नहीं करते जिसका फायदा वो बाहर के लोग उठाते हैं जो ऐसे दिन दुखी उपेक्षित बिमार लोगों का पता साजी करते रहते हैं किसी कुशल शिकारी की तरह । वो ऐसे लोगों से हमदर्दी जाहिर करते हैं और मिठी मिठी चिकनी चुपड़ी बात करके झांसे में लेकर प्रार्थना सभा / चंगाई सभा तक ले जाते हैं और धीरे से अपने मोहपाश में फांसकर मतांतरित धर्मांतरित करा लेने में कामयाब हो जाते हैं ।

अगर हर जाति समाज परिवार के लोग और गांव शहर के सक्षम लोग थोड़ा सा उदारता दिखाते इंसानी फर्ज अदा करते उसे अपने शिक्षा व सम्मान का तथा अपनी समझदारी का सदुपयोग करते सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उपचार सुविधा सुलभ कराने का पुनीत पुण्यदाई कार्य करने लगे तो लोग बाहर वालों के झांसे में आकर प्रार्थना सभा जाने और मतांतरण धर्मांतरण करने जाएगा ही क्यों …???

आज जरूरत है हम सबको अपने इंसानी फर्ज का निर्वाह करते अपनी नज़र में और संज्ञान (जानकारी)में आने वाले का सहयोग करने की तभी मतांतरण धर्मांतरण करने कराने के खेल पर अंकुश लग पायेगा और बड़े तेवड़ा /आमाबेड़ा में हुए घटना की तरह दुर्भाग्यपूर्ण घटना से अपने गांव एवं क्षेत्र को बचा पाएंगे….

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