Home चर्चा में स्वीमिंग पुल तो छोड़िए, सडक तक नहीं बनाई, रेरा ने डेवलपर को...

स्वीमिंग पुल तो छोड़िए, सडक तक नहीं बनाई, रेरा ने डेवलपर को एक महीने में विकास कार्य पूरा करने कहा

9
0

बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

सन सिटी कॉलोनी का मामला, पंजीकरण न करने पर कार्रवाई के आदेश 
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने जगदलपुर की सन सिटी कॉलोनी में अधूरे विकास कार्यों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। प्राधिकरण ने प्रमोटर पृथ्वी डेवलपर्स को नाली, सडक़, उद्यान, जल आपूर्ति और क्लब हाउस जैसे कार्यों को एक महीने के अंदर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही परियोजना को रेरा में पंजीकृत न कराने के लिए धारा 59 के तहत अलग से कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है। यह फैसला एक प्रकरण में पारित किया गया है। इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करेंगे।जगदलपुर नगर निगम अब कार्यों की निगरानी करेगा। डेवलपर ने अभी फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

Rera (2)

सन सिटी के प्लॉट नंबर 302 और 303 के मालिक और मामले के शिकायतकर्ता प्रीतेश दोषी ने 2018 में रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि डेवलपर ने ब्रोशर में स्विमिंग पुल, सडक़ें, पानी की आपूर्ति, पार्क जैसी सुविधाओं का वादा किया था, लेकिन 14 साल बाद भी ये सुविधाएं नहीं दी गईं। दोषी ने 2004-2005 में प्लॉट खरीदे थे और कुल 6.51 लाख रुपये का भुगतान किया था। उन्होंने कहा कि डेवलपर ने विकास कार्य पूर्ण किए बिना ही 2008 में नगर निगम से पूर्णता प्रमाण पत्र ले लिया था। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि एक दर्जन से अधिक काम अधूरे हैं। रेरा ने मामले की जांच के लिए कमिश्नर नियुक्त किया, जिसकी रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि ड्रेन वर्क), कल्वर्ट पुलिया, सीसी रोड, उद्यान विकास, वृक्षारोपण, जल आपूर्ति नेटवर्क, ब्लैक टॉप रोड और क्लब हाउस का निर्माण अधूरा है। केवल विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ है। अनावेदक पृथ्वी डेवलपर्स ने दावा किया कि परियोजना केवल विकसित प्लॉट्स की है और विकास कार्य 2008 में पूरे हो चुके थे। लेकिन प्राधिकरण ने हाईकोर्ट के 2021 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि परियोजना ऑनगोइंग है, इसलिए रेरा पंजीकरण जरूरी था। हाईकोर्ट ने माना था कि अधूरे कार्यों के कारण पूर्णता प्रमाण पत्र रद्द किया जा सकता है और रेरा के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय शुक्ला और सदस्य धनंजय देवांगन ने आदेश में कहा है कि डेवलपर को सक्षम प्राधिकारी से मानकों के अनुसार कार्य पूर्ण कर पूर्णता प्रमाण पत्र लेना होगा। शिकायतकर्ता की क्षतिपूर्ति की मांग पर प्राधिकरण ने कहा कि यह न्याय निर्णायक अधिकारी के क्षेत्राधिकार में है, इसलिए उसे अलग से दावा करना होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here