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दुर्ग नगर निगम के कमिश्नर पर गंभीर आरोप, अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार… करवाते है निजी काम

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
छत्तीसगढ़ के दुर्ग नगर निगम में हाई प्रोफाइल घोटाले ने तूल पकड़ लिया है। नगर निगम के कमिश्नर पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को नौकरी के दायरे से बाहर जाकर निजी गुलामी का काम करवा रहे हैं। फल-सब्जियां लाना, फिल्म की टिकट बुक करना, यहां तक कि घर के नौकराने जैसे कामों तक को मजबूर किया जा रहा है। यह मामला इतना संगीन हो गया है कि अब हाईकोर्ट के दरवाजे तक पहुंच चुका है। स्थानीय कर्मचारी संगठनों ने इसे ‘तालिबानी हरकत’ करार देते हुए भारी विरोध जताया है।
सूत्रों के अनुसार, कमिश्नर साहब अंगूर के शौकीन हैं। खासकर लाल रंग के बिना बीज वाले छोटे-छोटे अंगूर उनकी पसंदीदा डिश हैं। रोजाना बाजार से ताजा अंगूर मंगवाने के अलावा, सब्जियां, फल और अन्य घरेलू सामान लाने का जिम्मा क्लर्कों, चपरासियों और अन्य जूनियर स्टाफ पर डाला जाता है। एक पूर्व कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कमिश्नर साहब का ऑफिस एक बाजार बन गया है। सुबह-सुबह फल वाले को फोन करके सामान मंगवाते हैं, बिल हमें भरना पड़ता है। शाम को फिल्म टिकट बुक करवाना तो आम बात है। कभी-कभी घर पर खाना बनवाने या सफाई का काम भी सौंप देते हैं। यह सब डर के माहौल में होता है, वरना प्रमोशन या नौकरी पर संकट।”
यह अहंकार केवल दुर्ग तक सीमित नहीं। पूरे देश में सरकारी दफ्तरों, निजी कंपनियों और हर क्षेत्र में उच्च अधिकारी अपने अधीनस्थों के साथ वैसा ही बर्ताव करते नजर आते हैं। वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स में ऐसे कई उदाहरण सामने आते रहते हैं, जहां बॉस बनकर नौकरों जैसा शोषण किया जाता है। दुर्ग के इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर साहू ने कहा, “यह न केवल अनैतिक है, बल्कि कानून का उल्लंघन भी। हम हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। अगर कमिश्नर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन करेंगे।”
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक जूनियर क्लर्क ने अनाम पत्र लिखकर वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की। पत्र में विस्तार से कमिश्नर के निजी शौक और शोषण की पूरी कथा बयां की गई। जांच के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अब सुनवाई की तारीख तय हो चुकी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नगर निगम प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन आंतरिक सर्कल में हड़कंप मचा हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे अधिकारी विकास के नाम पर शहर को लूट रहे हैं। दुर्ग नगर निगम, जो स्वच्छता, सड़क निर्माण और जल आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का जिम्मेदार है, अब भ्रष्टाचार और शोषण के कारण बदनाम हो रहा है। एक निवासी ने बताया, “कमिश्नर साहब को अंगूर चाहिए तो खुद खरीदें। टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद न करें।”
यह घटना सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अहंकार को उजागर करती है। देखना दिलचस्प होगा कि हाईकोर्ट क्या फैसला सुनाता है। अगर सख्त कार्रवाई हुई, तो यह अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी बनेगी। वरना, ‘बेशर्मी’ का यह सिलसिला जारी रहेगा। कर्मचारी संगठन पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हैं।

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