बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
= धर्म परिवर्तन रोकने ग्रामीण चला रहे हैं विशेष अभियान =
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुड़ाल से शुरू हुआ विवाद देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया। ग्रामसभा द्वारा गांव की सीमा पर लगाए गए होर्डिंग्स के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
ग्रामसभा ने गांव के प्रवेश द्वारों पर सूचना पट्ट लगाकर ईसाई पादरियों एवं धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों के प्रवेश पर रोक का उल्लेख किया था। ग्राम सभा का कहना था कि यह कदम गांव में कथित रूप से प्रलोभन या दबाव के माध्यम से हो रहे धर्म परिवर्तन को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस मामले में पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ग्राम सभा की कार्रवाई को सही ठहराया था। हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलीन गोंसाल्वेस ने दलील दी कि गांव में प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध असंवैधानिक है और इस पहलू पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। वहीं केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता को नियमों के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों का पहले उपयोग करना चाहिए था। सुनवाई के दौरान अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के उस भाग का उल्लेख किया, जिसमें याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी, अर्थात ग्रामसभा, के समक्ष अपनी बात रखने की स्वतंत्रता दी गई थी। पीठ ने टिप्पणी की कि संबंधित प्राधिकारी साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच कर सकता है। अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। इस प्रकार कुड़ाल गांव से शुरू हुआ यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां ग्रामसभा की कार्रवाई को बरकरार रखा गया है।









