केशकाल संवाददाता – विनीत पिल्लई
हात्मा (बड़ेराजपुर)।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शासकीय हाई स्कूल हात्मा में प्रेरणादायक विज्ञान मेला आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विज्ञान शिक्षक संदीप सेन का संदेश रहा— “जादू नहीं, विज्ञान है”। उन्होंने विद्यार्थियों को अंधविश्वास से दूर रहकर हर घटना के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझने के लिए प्रेरित किया।
कबाड़ से जुगाड़: 33 से अधिक प्रयोगों का प्रदर्शन
विद्यार्थियों ने 33 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों को “कबाड़ से जुगाड़” मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया। इन प्रयोगों में रचनात्मकता के साथ-साथ वैज्ञानिक सिद्धांतों की सरल व्याख्या की गई।
वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric Pressure):
खाली बोतल और स्ट्रॉ की मदद से हवा के दबाव का प्रभाव दिखाया गया।
सतह तनाव (Surface Tension):
पानी-तेल मिश्रण और सुई को पानी पर तैराकर तरल पदार्थों के गुण समझाए गए।
प्रकाश का परावर्तन व अपवर्तन: लेंस और कांच के टुकड़ों से इंद्रधनुष बनने और दृष्टि प्रक्रिया को समझाया गया।
विद्युत व चुंबकत्व:
घरेलू सामग्री से बैटरी और छोटी मोटर बनाकर बिजली के प्रवाह का प्रदर्शन किया गया।
संवहन धारा (Convection Current):
तरल में गर्म अणुओं के ऊपर उठने और ठंडे अणुओं के नीचे आने की प्रक्रिया से ऊष्मा संचरण समझाया गया।
घनत्व (Density):
विभिन्न वस्तुओं को पानी में डालकर बताया गया कि कौन-सी वस्तु क्यों डूबती या तैरती है।
वायुमापी (Anemometer/Barometer):
हवा की गति और वायुदाब मापने वाले यंत्र का मॉडल प्रस्तुत किया गया।
फेफड़ा मॉडल (Lung Model):
गुब्बारे और बोतल से श्वसन प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन किया गया।
विज्ञान के साथ पर्यावरण संरक्षण
कार्यक्रम में 44 औषधीय एवं स्थानीय पौधों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। विद्यार्थियों ने पौधों के वैज्ञानिक नाम और उनके औषधीय गुणों की जानकारी दी। इससे यह संदेश गया कि प्रकृति स्वयं एक विशाल प्रयोगशाला है।
रचनात्मक प्रतियोगिताएं और तार्किक गतिविधियां
कार्यक्रम के दौरान दिमागी खेल, विज्ञान क्विज, चित्रकला, निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। ‘भविष्य का विज्ञान’ विषय पर बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को चित्र और लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया। अंधविश्वास के खिलाफ वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर विद्यार्थियों ने प्रभावशाली भाषण भी दिए।
शिक्षक और समुदाय की भूमिका
विज्ञान शिक्षक संदीप सेन ने अपने संबोधन में कहा कि, “विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे आसपास होने वाली हर घटना में विज्ञान छिपा है। जब हम किसी घटना के पीछे ‘क्यों’ और ‘कैसे’ खोजते हैं, तभी वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है।”
विद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त शिक्षक स्टाफ के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने के साथ-साथ समुदाय को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।
यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा का मंच बना, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय पहल भी साबित हुआ।







