जगदलपुर। करीब पांच दशकों तक माओवादी आंदोलन की कमान संभालने वाला कुख्यात नेता Muppala Lakshmana Rao उर्फ गणपति जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकता है। चर्चा है कि वह केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी में सरेंडर कर सकता है। गणपति लंबे समय से देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में गिना जाता है और उस पर विभिन्न राज्यों में कुल मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है।
बताया जाता है कि गणपति ने करीब 50 वर्षों तक देश में माओवादी सशस्त्र आंदोलन का नेतृत्व किया। वर्ष 2018 में उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उसने संगठन के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बड़े स्तर पर चलाए गए अभियानों के बाद वह नेपाल में छिपा हुआ था। हाल ही में उसे वहां से पकड़कर भारत लाए जाने की चर्चा भी सामने आई है।
‘टीचर’ के नाम से था प्रसिद्ध
माओवादी संगठन के भीतर गणपति को ‘टीचर’ के नाम से जाना जाता था। उसके नेतृत्व में कई बड़े हमले हुए और देश के अलग-अलग हिस्सों में माओवादी नेटवर्क का विस्तार हुआ। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गणपति आत्मसमर्पण करता है, तो यह माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
सरेंडर को लेकर हुई चर्चा
हाल के दिनों में कई माओवादी नेताओं—देवजी, चोक्का राव और मल्लाजी रेड्डी सहित अन्य के आत्मसमर्पण के बाद इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर चर्चा हुई है। बताया जाता है कि Revanth Reddy ने राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, जिसमें गणपति के संभावित आत्मसमर्पण को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।
गणपति मूल रूप से Jagitial district के सारंगापुर क्षेत्र का रहने वाला है। उसकी पत्नी सुजाता के भी माओवादी गतिविधियों से जुड़े होने की जानकारी सामने आती रही है।







