520 साल पहले गुरु नानक देव जी के चरण रज से पावन हुई इस धरा के विकास को मिली गति
बसना। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को बसना क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर स्थित नानकसागर में आयोजित ‘होला मोहल्ला’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर प्रदेश की खुशहाली की अरदास की। सिख समाज द्वारा मुख्यमंत्री का सरोफा भेंट कर भव्य स्वागत किया गया।
संतों की तपोभूमि है छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री
कीर्तन समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गढ़फुलझर की पावन भूमि का कण-कण पूज्य गुरु नानक देव जी की स्मृतियों से जुड़ा है। उन्होंने कहा:
“छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है। गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 2.50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं और कार्य प्रगति पर है। सरकार नानकसागर को देश के प्रमुख धार्मिक मानचित्र पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इतिहास के पन्नों में गढ़फुलझर: 520 साल पुराना नाता
इस दौरान गुरु नानक देव जी के ऐतिहासिक आगमन पर प्रकाश डाला गया। उल्लेखनीय है कि:
* प्रथम उदासी: वर्ष 1506 में सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी जगन्नाथ पुरी जाते समय यहाँ दो दिनों तक ठहरे थे।
* गुरुखाप का इतिहास: उनके उपदेशों से प्रभावित होकर तत्कालीन राजा मानस राज सागर चंद भेना ने 5 एकड़ भूमि गुरु महाराज को समर्पित की थी, जिसे आज भी ‘गुरुखाप’ कहा जाता है।
* भव्य निर्माण: बसना विधायक संपत अग्रवाल ने बताया कि यहाँ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर एक भव्य गुरुद्वारा प्रस्तावित है, जो क्षेत्र को नई पहचान देगा।

सर्वधर्म समभाव की अनूठी मिसाल
गढ़फुलझर न केवल सिख समाज, बल्कि सर्वधर्म समभाव का केंद्र है। यहाँ प्राचीन रानी महल के अवशेष, सुरंगें और प्राचीन मंदिर (रामचंडी एवं बूढ़ादेव) भी मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने इन धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के निर्देश दिए हैं।
दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, बसना विधायक संपत अग्रवाल, राज्य बीज निगम अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, येतराम साहू, अखिलेश सोनी, भूपेंद्र सिंह सवन्नी सहित सिख समाज के प्रमुख पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
रिपोर्ट: न्यूज36गढ़
अब्दुल रफीक खान







