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भारत के टुकड़े टुकड़े करना चाहते हैं नक्सली

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

पूरे देश में खून खराबा करने का नया ऐलान 
जेन जी नक्सली रणिता ने जारी किया प्रेस नोट 
रणिता ने कहा- नहीं करेंगे सरेंडर, जारी रहेगी लड़ाई 

जगदलपुर। अमन की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे बस्तर में नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की माड़ डिवीजन कमेटी ने एक प्रेस नोट जारी कर अपने खतरनाक मंसूबे जाहिर किए हैं। यह संगठन मंशा पाले बैठा है भारत के टुकड़े टुकड़े करने की, युवा पीढ़ी को देश के खिलाफ भड़काने की, मगर हमारे सुरक्षा बलों की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे ऐसे नापाक मंसूबे धराशाई हो जाएंगे।

माड़ डिवीजन की सचिव रणिता के नाम से जारी इस प्रेस नोट ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता एकबार फिर बढ़ा दी है। प्रेस नोट में रणिता ने खुद को “जेन जी नक्सली” बताते हुए साफ कहा है कि संगठन आत्मसमर्पण नहीं करेगा और उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। प्रेस नोट में देशभर में हिंसक गतिविधियां जारी रखने की बात कही गई है साथ ही भारत के टुकड़े करने का भी जिक्र किया गया है। इससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। इससे पहले जगदलपुर में नक्सली नेता रूपेश के आत्मसमर्पण के बाद माड़ डिवीजन कमेटी लगभग खत्म मानी जा रही थी। लेकिन अब अचानक आए इस प्रेस नोट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस प्रेस नोट की सत्यता और इसके पीछे के नेटवर्क की गहन जांच में जुट गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि प्रेस नोट वास्तव में माओवादी संगठन की ओर से जारी किया गया है या इसके पीछे कोई और रणनीति काम कर रही है। बस्तर में सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के बीच माओवादी संगठन की इस नई सक्रियता को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर हैं।

हिड़मा को मसीहा बताने वालों का हाथ?
31 मार्च 2026 तक माओवाद के समूल सफाये संबंधी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के ऐलान ने नक्सली संगठनों और उनके समर्थक देश विरोधी ताकतों की नींद उड़ा कर रख दी है।बस्तर तेजी से नक्सलमुक्त होता जा रहा है। यहां शांति स्थापित हो रही है और विकास के नए द्वार खुल गए हैं। विकास, शांति और राष्ट्र विरोधी तत्वों को यह पहल रास नहीं आ रही है। प्रेस नोट में जिस जेन जी नक्सली प्रवक्ता रणिता का नाम है, उसे उन तत्वों में शामिल माना जा रहा है, जिन्होंने कुख्यात नक्सली हिड़मा के मारे जाने पर मातमपुरसी की थी, उसके चिता स्थल पर जमा होकर प्रार्थना की थी और शोक मनाया था। कुख्यात नक्सली हिड़मा को मसीहा बताने वाले कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए हिड़मा को देवता बना कर पूरे देश में उसका गुणगान करते रहे हैं। इस ताजा प्रेस नोट को भी इसी घटनाक्रम से जोड़ कर देखा जा रहा है। लेकिन केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता और सुरक्षा बलों के हौसले के आगे ऐसे लोग टिक नहीं पाएंगे।

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