बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
लोकतांत्रिक प्रणाली से ही विकास संभव: केदार
बस्तर की संस्कृति छा गई है पूरे देश के पटल पर: किरण देव
जगदलपुर। आज बस्तर हेरिटेज मैराथन का आयोजन लालबाग मैदान से किया गया। प्रदेश के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप संसद महेश कश्यप, विधायक किरण देव महापौर संजय पाण्डे एवं अफसरों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मैराथन में मंत्री सांसद, विधायका कमिश्नर अईजी, कलेक्टर एसपी सहित 15 हजार से अधिक धावकों ने दौड़ लगाई। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर में आयोजित मैराथन प्रतियोगिता ही नहीं देश के लिए बहुत बड़ा संदेश भी है। बस्तर सहित देश के विभित्र राज्यों के अलावा दुनिया के कई देशों के धावक शामिल हुए।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप बस्तर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 50 वर्षों तक नक्सलवाद की पीड़ा हमारे लोगों ने झेली है। आज बस्तर शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हम इसके लिए देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री एवं प्रदेश के मुखिया को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। जिनके कारण से पूरे जोश के साथ छत्तीसगढ़ एवं बस्तर विकास समृद्धि की राह पर हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर जो पिछड़े क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, अब वही बस्तर किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहेगा। हर क्षेत्र में यहां के लोग जाने जाएंगे। श्री कश्यप ने कहा कि जो लोग लोकतंत्र पर विश्वास नहीं करते थे वे आत्मसमर्पित नक्सली भी बस्तर के विकास के लिए इस दौड़ में शांति स्थापित करने के लिए शामिल हुए हैं। यह बस्तर ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। बहुत बड़ा संदेश इस प्रदेश से जा रहा है। इस आयोजन ने पूरे देश को यह बता दिया कि बंदूक से किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता बंदूक से कोई भी देश- प्रदेश विकास नहीं कर सकता।लोकतांत्रिक प्रणाली से ही देश-प्रदेश के विकास का समृद्ध एवं विकसित बन सकता है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक जगदलपुर किरण देव ने कहा कि बस्तर बदल रहा है रहा है, शांति और और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दृढ़ इच्छाशक्ति से तय समय सीमा 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खात्मे का संकल्प साकार होता दिख रहा है। आज बस्तर हेरिटेज मेलन में 15 हजार से ज्यादा धावक भी शामिल हुए हैं। जिन्हें 25 लाख तक का ईनाम वितरण किया गया।
बस्तर में कई आयोजन हो रहे हैं ओलंपिक, पण्डुम, मैराथन जिसे बस्तर के लोगों में उत्साह बढ़ रहा है। बस्तर की संस्कृति पूरे देश के पटल पर देखी जा सकती है। बस्तर की ऐतिहासिक धरा ने रविवार को एक नया कीर्तिमान रचा जहां 15 हजार से अधिक धावकों विशाल बस्तर हेरिटेज मेराथन 2026 में अपनी रफ्तार का प्रदर्शन किया। यह महाकुंभ न केवल एक खेल प्रतियोगिता है बल्कि यह क्षेत्र के बदलते दौर और विश्वास की एक जीवंत झांकी भी है।
शामिल हुए 200 पूर्व नक्सली
इस भव्य आयोजन की सबसे प्रेरक तस्वीर उन 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी केडरों के रूप में उभरी है, जो कभी संघर्ष की राह पर थे, लेकिन अब मुख्यधारा का हिस्सा बनकर समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ने को लालायित हैं। बस्तर संभाग के सातों जिलों सुकमा दंतेवाड़ा बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कांकेर और कोंडागांव से आए आत्मसमर्पित नक्सलियों ने शासन की पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन जैसी कलाणकारी नीति की सफलता का जीवंत उदाहरण पेश किया। इस मेराथन को अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि कुल
15000 से अधिक पंजीयनों में विदेशी धावक भी शामिल हुए थे। जिनमें लंबी दूरी की दौड़ के लिए विश्व विख्यात इथोपिया और केन्या के भी एथलीट बस्तर की सड़कों पर अपनी धाक जमाते नजर आए।







