Home चर्चा में शिक्षकों की पीड़ा (विशेष लेख) : रामचंद्र सोनवंशी

शिक्षकों की पीड़ा (विशेष लेख) : रामचंद्र सोनवंशी

34
0
 रामचंद्र सोनवंशी एक शिक्षक ने शिक्षकों के भारी कार्यभार, मानसिक तनाव,  प्रशासनिक बोझ और अनुबंध आधारित अस्थिरता प्रमुख हैं।  (विशेषकर व्यावसायिक शिक्षक), कार्य-जीवन संतुलन की कमी और लगातार बदलते तकनीकी/शैक्षणिक दबाव के कारण बर्नआउट का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर गरिमा प्रभावित होती है।
शिक्षकों के प्रमुख दर्द और चुनौतियां:
आर्थिक असुरक्षा: 1 सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार सभी शिक्षकों को टेट परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य  के बाद शिक्षकों में जो भय का वातावरण है पूरे भारत देश के समस्त शिक्षक भयभीत होकर अपने नौकरी को बचाने हेतु तरह-तरह के विचार कर रहे हैं एक तरफ अपने नौकरी बचाना दूसरी तरफ अपने आर्थिक स्थितियों को सुधारना तीसरा अपने घर परिवार एवं समाज के प्रति सोच है और डर, जो उनके परिवार के पालन-पोषण में बड़ी बाधा है।
अत्यधिक कार्यभार (Workload Over): कक्षा शिक्षण के अलावा प्रशासनिक कार्य, रिकॉर्ड-कीपिंग और अन्य गैर-शिक्षण कार्यों से वे अत्यधिक तनाव में रहते हैं।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य: लगातार दबाव से बर्नआउट, थकान, एंग्जायटी और रीढ़ की हड्डी/पैरों में दर्द (Musculoskeletal pain) की समस्याएं आम हैं।
तकनीकी दबाव: पारंपरिक शिक्षण से तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बदलाव के साथ तालमेल बिठाना, नए सॉफ्टवेयर और प्लेटफॉर्म सीखने का दबाव।
अनुशासनहीनता: कक्षाओं में छात्रों के व्यवहार और अनुशासन को प्रबंधित करने में आने वाली कठिनाइयां।
सम्मान और मान्यता की कमी: कभी-कभी समाज और सिस्टम द्वारा अनुचित दोषारोपण का सामना करना पड़ता है।
इन चुनौतियों के कारण, शिक्षक अक्सर हताशा और निराशा का अनुभव करते हैं, जो अंततः शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
अंत में रामचंद्र सोनवंशी के द्वारा शासन एवं प्रशासन करबद्ध निवेदन करते हुए सरकार शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए  tet परीक्षा पर पुनर्विचार याचिका दायर कर कोई उचित कदम उठाए जिससे लाखों शिक्षक का भविष्य बना रहे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो और शिक्षकों का अपना नौकरी पेसा भी बच जाए इससे लाखों परिवार का जीवन में सुधार होगा और मन लगाकर बच्चों के साथ अध्यापन कार्य करेंगे।
मैं एक शिक्षक होने की नाते मैं समस्त उन शिक्षक नेताओं से अपील करना चाहूंगा कि आज के परिदृश्य में शिक्षा का स्तर को ऊंचा उठाने के लिए शिक्षकों में क्या होनी चाहिए चिन्तन  का समय है जब शिक्षा ही नहीं बचेगा तो देश की विकास उन्नति पर प्रश्न  चिन्ह लगेगा सम्माननीय समस्त शिक्षक  पदाधिकारी हम अपने बारे चिंतन करें विचार करें आने वाला समय में देश का शिक्षा नीति कैसा होगा
यह लेख लेखक के स्वतंत्र विचारों पर आधारित है, जिसका किसी भी संस्था या समाचार मंच से कोई व्यक्तिगत या पक्षपातपूर्ण संबंध नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here