प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर महत्वपूर्ण बयान दिया। Iran-Israel के बीच बढ़ते तनाव और उसके Global Impact को देखते हुए PM Modi का यह संबोधन अहम रहा। जान लें कि लोकसभा में यह संबोधन ऐसे समय में हुआ, जब वैश्विक स्तर पर परिस्थितियां तेज रफ्तार से बदल रही हैं और इसका प्रभाव देश की Economy, Energy Security और विदेश नीति पर भी पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में मौजूदा वैश्विक हालात, भारत की स्ट्रैटेजी और अपनी सरकार के रुख को स्पष्ट किया। इससे पहले भी सरकार ने इशारा किया था कि Middle East Crisis को लेकर सतर्क है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। बीते रविवार को PM मोदी के साथ मंत्रियों की हुई हाई लेवल बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि वेस्ट एशिया में बढ़ती टेंशन का असर भारत के ऑयल इम्पोर्ट, खाद सप्लाई और बिजनेस पर पड़ सकता है।
मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान से अमेरिका और इजरायल के युद्ध की पृष्ठभूमि में उपजे हालात की समीक्षा की। इसमें जरूरी वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता को सुनिश्चित करने के खातिर अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही, किसानों के लिए खाद की भविष्य में लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के खातिर उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी मंथन किया गया।







