कुछ दिन शांत बैठने के बाद फिर से आतंक मचाने लगे रेत माफिया
बकावंड। क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं पर शिकंजा कसने की खनिज और राजस्व विभाग की सभी कोशिशें लगभग नाकाम हो गई हैं। कई वर्षों से इस विकासखंड के इन्हीं क्षेत्रों में रेत माफिया माइनिंग विभाग के सहयोग से जगह बदल बदल कर रेत का अवैध खनन और परिवहन कर रहे हैं। हालांकि राजस्व विभाग से एसडीएम और तहसीलदार समय समय पर मौका मुआयना और कार्रवाई भी करते है किंतु इन स्मगलरों की राजनीतिक पैठ इतनी ऊंची है कि वह अपने कार्य को दिन हो या रात अंजाम देते रहते हैं।

बकावंड विकासखंड के बाजावंड, बोरीगांव, बनियागांव क्षेत्र में इंद्रावती नदी एवं भास्कली नदी का सीना चीर कर ये माफिया रेत का दोहन कर रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि पदस्थ खनिज विभाग के मौजूदा अधिकारी पिछले कई सालों से यहीं पदस्थ हैं। इन पर हर वर्ष ऐसे आरोप लगाया जाता है जिसकी जांच भी होती है किंतु कोई भी कलेक्टर इन्हें हटाने में सफल नहीं होते। कुछ लोगों के अनुसार क्षेत्र के जाने माने नेता ही इस रेत स्मगलिंग को अंजाम देते हैं। अखबार में खबर छपने के बाद रेत खनन कुछ दिन बंद था, लेकिन कल रात्रि से खनन और परिवहन जेसीबी पोकलेन और हाइवा के माध्यम से फिर दोगुनी रफ्तार से शुरू कर दिया गया है। उड़ीसा और बस्तर की सीमा से गुजरने वाली भास्कली नदी के साथ ही इंद्रावती नदी में भी रेत के बेतहाशा अवैध खनन से बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत बनियागांव के करीब दर्जन भर किसानों की कृषि भूमि तबाह हो चुकी है। किसान अधिकारियों के समक्ष मामले की कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं खनिज विभाग के अधिकारी दिखावे के लिए क्षेत्र में आते हैं और रहस्यमय ढंग से बिना कोई कार्रवाई किए लौट जाते हैं।
बनियागांव पंचायत के पीड़ित किसान हेमराज भारती, नीलधर ध्रुव, टिकन भारती,तोशिक भारती, रूपेंद्र नागेश, जगत राम नागेश, विद्याप्रकाश सेठिया और अन्य किसानों ने मामले की शिकायत बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा से की है। शिकायत में बताया गया है कि भास्कली नदी में उड़ीसा सीमा से लगकर बेतहाशा रेत का खनन जेसीबी के जरिए कर रेत का परिवहन टिप्पर, ट्रैक्टर आदि वाहनों से किया जा रहा है। रेत निकालने के लिए नदी में करीब बीस फीट गहरा गड्ढा कर दिया गया है। इसके चलते तट पर स्थित खेतों का तेजी से कटाव हो रहा है। इसके साथ ही नदी में बाढ़ आने पर आसपास के खेतों में रेत भर जाती है। कटाव के चलते पचास एकड़ से भी अधिक कृषि भूमि नदी में समा चुकी है और रेत भरने से कई एकड़ खेती की जमीन नष्ट हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के संरक्षण में यह खेल चल रहा है।किसानों ने कलेक्टर श्री छिकारा से रेत माफिया और भ्रष्ट कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।







