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भूमिहीन मजदूरों के जीवन में नई रोशनी: छत्तीसगढ़ सरकार की ऐतिहासिक पहल प्रदेश प्रवक्ता इंजीनियर रवि पाण्डेय

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जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जयसवाल
उन परिवारों के लिए वरदान बनकर उभरी है
जिला जांजगीर-चांपा ।
छत्तीसगढ़ में भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए एक बड़ी राहत और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा लाखों मजदूर परिवारों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता राशि भेजी गई है, जिससे उनके जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास का संचार हो रहा है।3
इस योजना के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बलौदाबाजार जिले के पंडित चक्रपाणि शुक्ल स्कूल मैदान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में हितग्राहियों को लाभ राशि वितरित की। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में लगभग 4,95,000 से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को ₹495.96 करोड़ की राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी गई है।
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता इंजीनियर रवि पाण्डेय ने इस योजना को मजदूरों के आत्मबल को बढ़ाने वाला और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रतिवर्ष ₹10,000 की सहायता राशि भूमिहीन मजदूरों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं।
यह योजना विशेष रूप से उन परिवारों के लिए वरदान बनकर उभरी है, जिनके पास खेती के लिए भूमि नहीं है और वे मजदूरी पर निर्भर हैं। आर्थिक सहायता मिलने से अब वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं पर भी ध्यान दे पा रहे हैं।
इसके साथ ही, यह योजना सामाजिक समावेशन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। आदिवासी समुदायों सहित सभी पात्र वर्गों को इसका लाभ मिल रहा है, जिससे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंच रही है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं:
हर वर्ष ₹10,000 की सीधी आर्थिक सहायता
डीबीटी के माध्यम से पारदर्शी भुगतान
4.95 लाख से अधिक परिवारों को लाभ
सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर
भूमिहीन मजदूरों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूमिहीन मजदूरों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की दिशा में एक ठोस प्रयास है। आने वाले समय में यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है, तो यह राज्य के ग्रामीण आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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