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TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग: रामचंद्र सोनवंशी बोले — एक ही नियुक्ति के शिक्षकों के लिए अलग नियम क्यों?

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रामचंद्र सोनवंशी ने कहा TET परीक्षा केवल कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले शिक्षकों के लिए ही क्यों आवश्यक
सोनवंशी ने आगे शासन एवं प्रशासन से निवेदन करते हुए तथा सभी शिक्षाविद,सामाजिक संगठन,विभिन्न राजनीतिक पार्टी, एवं संत समाज ,से भी अपील करते हुए कहा है यह केवल योग्यता ,अयोग्यता की बात नहीं इससे लाखों शिक्षक एवं उसके परिवार के बीच में सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्थाओं पर प्रभाव पड़ेगी सरकार को चाहिए इस अव्यवस्थाओं से कैसे बचा जा सके इसका हल कैसे निकाला जा सके इस पर आवश्यक विचार कर तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता है यह नियम किसी एक विशेष वर्ग के लिए बनाना सही नहीं है
वास्तव में  एक ही समय एक ही तिथि की नियुक्त  शिक्षकों के लिए अलग-अलग व्यवस्था क्यों हमारे मौलिक अधिकार एवं समानता की अधिकार का हनन है
  (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को समाप्त करना या उसमें बदलाव करना पूरी तरह से सरकार के नीतिगत दायरे में है, लेकिन यह मामला जटिल है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 में इसे अनिवार्य कर दिया है। ठीक है भारतीय संविधान में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस दिन कानून बनता है उसके पश्चात ही लागू होता है ठीक उसी प्रकार खिलाड़ी के लिए खेल का नियम खेल खेलने के पहले बनाया जाता है खेलते समय इसका कोई निर्णय नहीं बदला जा सकता इस विषय पर भी माननीय सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान में लेना चाहिए
यदि सरकार टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करती है या इसे समाप्त/संशोधित करना चाहती है, तो उसे निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:
अनुभवी शिक्षकों के लिए विशेष राहत (Exemption): जो शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं, उन्हें TET की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाना चाहिए। 2010 (RTE Act) से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे लागू करना अनुचित माना जा रहा है।
उम्र या सेवा अवधि के आधार पर छूट:  TET पास करने की आवश्यकता से राहत दी जानी चाहिए।
TET के बजाय अन्य मूल्यांकन विकल्प (Alternative Evaluation): TET केवल एक परीक्षा है, यह शिक्षण क्षमता का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता। सरकार अनुभव, कक्षा प्रदर्शन और पिछले रिकॉर्ड (Performance-Based Evaluation) को आधार बना सकती है।
प्रमोशन के लिए अनिवार्यता में ढील: सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए नौकरी में बने रहने के लिए TET अनिवार्य न हो, लेकिन भविष्य की नई नियुक्तियों (Direct Recruitment) के लिए इसे रखा जा सकता है।
संवैधानिक और कानूनी स्थिति:
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को माना है कि TET कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता है।
अल्पसंख्यक संस्थानों (Minority Institutions) को फिलहाल इस आदेश से कुछ राहत मिली है, जब तक कि बड़ी बेंच का फैसला नहीं आ जाता।
निष्कर्ष: सरकार को अनुभवी शिक्षकों के ज्ञान और उनके द्वारा दी गई दशकों की सेवा का सम्मान करते हुए, नई नियुक्तियों के लिए TET को अनिवार्य रखना चाहिए, लेकिन मौजूदा शिक्षकों पर इसे जबरन थोपने से बचना चाहिए।

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