Home चर्चा में आज भी पानी के लिए तरसता झलबासा, आदिवासी बृजिया समाज की पीड़ा

आज भी पानी के लिए तरसता झलबासा, आदिवासी बृजिया समाज की पीड़ा

22
0

पानी को तरसता झालबासा, आदिवासी बृजिया समाज की जिंदगी संकट में
विकास के दावों के बीच प्यासा झालबासा, स्वच्छ पानी से वंचित पूरा गांव
*हैंडपंप नहीं, नदी का गंदा पानी ही सहारा — झालबासा की दर्दनाक हकीकत
जल जीवन मिशन अधूरा, प्यास से जूझ रहा झालबासा गांव
आज भी विकास से दूर झालबासा, आदिवासी गांव में पानी का संकट गहराया
न पानी, न स्वास्थ्य, न शिक्षा — उपेक्षा झेल रहा झालबासा
गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, झालबासा में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
दो सौ आबादी का गांव प्यासा, अधूरा छोड़ दिया गया जल जीवन मिशन
पहाड़ी गांव झालबासा में पेयजल संकट, प्रशासन से राहत की उम्मीद
चुआं का पानी पीकर गुजर-बसर, विकास की राह देखता झालबासा*

कुसमी बलरामपुर

संवाददाता युसूफ खान

बलरामपुर। जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत साबाग ग्राम पंचायत का झालबासा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। करीब 200 से 250 की आबादी वाले इस छोटे से गांव में अधिकांश लोग आदिवासी बृजिया समाज से हैं, जो वर्षों से उपेक्षा का दंश झेलते हुए जीवन यापन कर रहे हैं। विकास के दावों के बीच यह गांव आज भी स्वच्छ पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में आज तक स्वच्छ पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि पूरे गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है। मजबूरी में ग्रामीणों को नदी-नालों और प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। लोग कपड़े से छानकर गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। गर्मी के मौसम में जल स्रोत सूखने लगते हैं, वहीं बरसात में पानी अत्यधिक दूषित हो जाता है। इससे डायरिया, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।

ग्रामीण बताते हैं कि वे नदी में “चुआं” बनाकर पानी निकालते हैं। यह प्रक्रिया बेहद जोखिमभरी होती है, लेकिन पीने और खाना बनाने के लिए यही एकमात्र विकल्प है। महिलाएं और बच्चे रोजाना दूर-दराज से पानी लाने के लिए मजबूर हैं, जिससे उनके समय और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ता है।

जल जीवन मिशन अधूरा, टूटी उम्मीदें
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दो वर्ष पहले जल जीवन मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन और टंकी निर्माण का कार्य शुरू हुआ था। उस समय लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें स्वच्छ पानी मिलेगा। लेकिन कुछ समय बाद कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। न पाइपलाइन बिछाई गई और न ही पानी की आपूर्ति शुरू हो सकी। योजना अधूरी रहने से ग्रामीणों की उम्मीदें पूरी तरह टूट चुकी हैं।

शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल
गांव में शिक्षा की स्थिति भी बेहद दयनीय है। प्राथमिक विद्यालय की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे गांव जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में रास्ते खराब हो जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कई अभिभावक दूरी और सुरक्षा की चिंता के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ रहते हैं, जिससे शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। किसी के बीमार होने पर ग्रामीणों को दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ता है। सड़क और परिवहन की कमी के कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कई बार छोटी बीमारी भी गंभीर रूप ले लेती है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बच्चों के आधार कार्ड बनाने तक के लिए गांव में कोई शिविर आयोजित नहीं किया गया है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होती है।

अधिकारियों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अधिकारी एक बार गांव का दौरा कर गए, लेकिन उसके बाद दोबारा स्थिति देखने कोई नहीं पहुंचा। इससे लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है।

बरसात में और बिगड़ते हालात
झालबासा गांव पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। नदी-नालों में गंदा पानी भर जाता है और ग्रामीण उसी के साफ होने का इंतजार करते हैं। कई बार बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर गांव का संपर्क भी कट जाता है। ऐसी परिस्थितियों में स्वच्छ पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ जाते हैं।

विकास की राह देखता झालबासा
न स्वच्छ पानी, न शिक्षा, न स्वास्थ्य सुविधा—इन समस्याओं के बीच झालबासा गांव आज भी विकास की राह देख रहा है। आदिवासी बृजिया समाज के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में हैंडपंप, जल जीवन मिशन का कार्य पूरा कराया जाए, साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक जीवन मिल सके।

अब सवाल यह है कि विकास के दावों के बीच आखिर कब झालबासा गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचेंगी और कब यहां के लोगों को पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए संघर्ष से राहत मिलेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here