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शिक्षा के लिए अनोखी मिसाल: बलरामपुर के दो युवाओं की साइकिल-कांवड़ यात्रा, छत्तीसगढ़ की पहचान और आदिवासी बच्चों के लिए दिया प्रेरणा संदेश

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बलरामपुर संवाददाता: युसूफ खान
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के दो युवाओं ने शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज को प्रेरित करने के उद्देश्य से एक अनोखी पहल करते हुए प्रेरणादायक यात्रा पूरी की। ग्राम टांगर म्हारी निवासी दीपक यादव और बलरामपुर नगर के वार्ड क्रमांक 4 के सूर्य यादव ने 9 दिनों की कठिन यात्रा कर प्रसिद्ध शिक्षक Khan Sir से मुलाकात की। दोनों युवाओं ने इस मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए कहा कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आगे कार्य करने की नई ऊर्जा मिली है।
इस यात्रा की विशेषता यह रही कि सूर्य यादव ने पूरा सफर साइकिल से तय किया, जबकि दीपक यादव कंधे पर कांवड़ लेकर पैदल चलते रहे। दीपक अपनी कांवड़ में लगभग 5-5 किलो धान और चावल लेकर चले, जो छत्तीसगढ़ की पहचान को दर्शाता है।  यह प्रतीकात्मक पहल “धान का कटोरा” कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास था।
दीपक यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, इसलिए उन्होंने अपने राज्य की पहचान दर्शाने के लिए धान और चावल साथ लेकर यात्रा की। उनका कहना था कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जागरूकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और पहचान को भी सम्मान देने का प्रयास है।
दोनों युवाओं ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य जिले के युवाओं, विशेषकर आदिवासी बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि बलरामपुर-रामानुजगंज आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। उनका लक्ष्य है कि आदिवासी बच्चों को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, ताकि वे बड़े संस्थानों में अध्ययन कर अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकें।
यात्रा के दौरान दोनों युवाओं ने कई स्थानों पर लोगों से संवाद कर शिक्षा का महत्व बताया और बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा साहस, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है तथा विशेष रूप से आदिवासी समाज के बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
Khan Sir से मुलाकात के बाद दोनों युवाओं ने बताया कि उन्हें समाज और शिक्षा के क्षेत्र में आगे भी काम करने की प्रेरणा मिली है। उनकी यह पहल क्षेत्र के युवाओं, खासकर आदिवासी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव का मजबूत संदेश दे रही है।

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