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TET अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर उबाल, 4 अप्रैल को दिल्ली में महा आंदोलन

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विनीत पिल्लई –

छत्तीसगढ़ सहित देशभर में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से बस्तर संभाग से इस आंदोलन को मजबूत समर्थन मिल रहा है, जहां से बड़ी संख्या में शिक्षक 4 अप्रैल 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित महा आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे हैं।

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा, उपाध्यक्ष केदार जैन और मनीष मिश्रा के साथ-साथ प्रदेश संयोजक रविंद्र राठौर, रामचंद्र सोनवानी, विकास राजपूत, राकेश साहू, प्रदीप पांडे, राज नारायण द्विवेदी, कमले विसेन और विक्रमराय के नेतृत्व में पूरे राज्य में आंदोलन का माहौल बना हुआ है।

शिक्षकों का मुख्य विरोध 2010/2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी TET लागू किए जाने के फैसले को लेकर है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर यह नियम थोपना अन्यायपूर्ण है। इसे शिक्षक “काला कानून” बताते हुए पुरानी नियुक्तियों को इस अनिवार्यता से स्थायी छूट देने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन के तहत 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के शिक्षक शामिल होंगे। इसके अलावा मध्य प्रदेश में भी 8 अप्रैल से 18 अप्रैल तक चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई है। यहां 12 शिक्षक संगठनों का संयुक्त मोर्चा जिला स्तर पर प्रदर्शन करेगा और 18 अप्रैल को भोपाल में ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ निकालकर अपना विरोध दर्ज कराएगा।

विरोध का प्रमुख कारण सितंबर 2025 में लागू किए गए नए नियम हैं, जिनके तहत लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए भी TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षकों का कहना है कि इससे न केवल उनकी नौकरी पर खतरा उत्पन्न हो गया है, बल्कि पदोन्नति की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पंजाब सहित कई राज्यों में शिक्षक सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

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