Home चर्चा में जंगल कटता रहा, मशीनें गरजती रहीं… और सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

जंगल कटता रहा, मशीनें गरजती रहीं… और सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

7
0

-वाड्रफनगर के कुंदी में 2-3 एकड़ वन भूमि पर अवैध खुदाई का आरोप, वन विभाग कटघरे में

युसूफ खान –

बलरामपुर/वाड्रफनगर। जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदी में वन भूमि पर कथित अवैध कटाई और खुदाई का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करीब 2 से 3 एकड़ वन क्षेत्र में दिन-रात जेसीबी मशीनें चलाकर पेड़ों को गिराया गया और जमीन की खुदाई की गई, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों के मुताबिक, लंबे समय तक मशीनों की आवाज गूंजती रही। पेड़ गिरते रहे, जमीन समतल की जाती रही, लेकिन वन विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी गतिविधि बिना विभाग की जानकारी के संभव नहीं है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सब विभाग की अनदेखी में हुआ या फिर किसी की मौन सहमति से।

स्थानीय ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया कि “यहां बिना सेटिंग के पत्ता भी नहीं हिलता, लेकिन इस मामले में तो पूरा जंगल ही हिला दिया गया।” उनका कहना है कि मशीनें लगातार चलती रहीं, पेड़ गिरते रहे और जमीन खोदी जाती रही, जबकि जिम्मेदार अधिकारी खामोश बने रहे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अफसरों की भूमिका संदिग्ध है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।

बताया जा रहा है कि इस घटना का वीडियो किसी ग्रामीण ने बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करेगा। हालांकि अब तक न तो जेसीबी मशीन जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है, न ही कथित अतिक्रमणकारियों पर कोई कार्रवाई की गई है और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम उठाया गया है। इससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। यदि इसी तरह वन भूमि पर अतिक्रमण और कटाई होती रही तो क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
गांव-गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय नागरिक पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अवैध कटाई में शामिल व्यक्तियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल इस पूरे मामले में वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विभाग की चुप्पी से सवाल और गहरे होते जा रहे हैं कि आखिर जंगल कटता रहा, मशीनें चलती रहीं और जिम्मेदार तंत्र मौन क्यों रहा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here