संवाददाता – लक्ष्मी नारायण लहरे
सारंगढ़ । पीड़ित महिला की आवाज क्यों नहीं सुनी जाती? यह सवाल अक्सर हमारे समाज में उठता है, जब महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ती हैं अमानवीय कृत्य पर विचार करती हैं तो उन्हें अक्सर समस्याओं का सामना करना पड़ता है यहां तक उनकी आवाज को भी कुचल दिया जाता और उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। पद्मिनी श्रीवास पिछले कुछ वर्ष से पत्रकारिता में सक्रिय हैं वे अपनी पोर्टल “छत्तीसगढ़ न्यूज अपडेट ” के माध्यम से पत्रकार पत्रकार की भूमिका निभा रही हैं । वे कहती हैं “महिलाओं का सम्मान और अधिकार हर किसी का कर्तव्य है, लेकिन अक्सर उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है।”
क्यों नहीं सुनी जाती पीड़ित महिला की आवाज?
पीड़ित महिला की आवाज नहीं सुनी जाती है, क्योंकि:
– समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव होता है।
– महिलाओं को अक्सर अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं होता है।
– पीड़ित महिला को अक्सर डराया-धमकाया जाता है।
– समाज में महिलाओं के प्रति सहानुभूति की कमी होती है।
पद्मिनी श्रीवास अपनी बात रखते हुए कहते हैं “नारी शक्ति एक मजबूत आवाज है जो समाज में परिवर्तन ला सकती है। हमें महिलाओं के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए और उनकी आवाज सुननी चाहिए।”
– महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करें।
– पीड़ित महिला को समर्थन दें।
– समाज में महिलाओं के प्रति सहानुभूति बढ़ाएं।
– नारी उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हों।
पीड़ित महिला की आवाज सुनना हमारा कर्तव्य है। हमें महिलाओं के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए और उनकी आवाज सुननी चाहिए। पद्मिनी श्रीवास के शब्दों में, “नारी शक्ति एक मजबूत आवाज है जो समाज में परिवर्तन ला सकती है। यही नहीं आज सभ्य समाज में भी नारी कहीं न कहीं इस व्यवस्था का शिकार हो जाती है अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें आज भी प्रताड़ित होना पड़ता है ।समाज की धुरी होते हुए भी उनकी आवाज दबा दी जाती है ।







