भारतीय राजनीति में आजादी के बाद कांग्रेस के सत्ता हड़प नीति के विरोध में आवाज बुलंद करने वाले जनसंघ ने राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए प्रयास प्रारंभ किया था पर राष्ट्रीय राजनीति में दमदार उपस्थिति का अभाव बना रहा फलस्वरूप आपातकाल की विभीषिका के दरमियान जयप्रकाश नारायण के अगुवाई में सभी विपक्षी राजनीतिक दलों ने दलगत सिद्धांतों से परे एकजुट हो कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेंका। परन्तु कांग्रेस की सत्ता से अलग करने के उपरांत भारतीय संस्कृति व परंपरा को पुनर्स्थापित करने, राष्ट्र प्रथम भाव के ध्येय के साथ काम करने वाले लोगों को राजनीतिक पटल पर एकजुट करने अटल बिहारी वाजपेयी के अगुवाई में 6 अप्रैल 1980 को फिरोजशाह कोटला मैदान में राष्ट्रवादियों के सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी की घोषणा की गई तब से 6 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता आज के दिवस को स्थापना दिवस में रूप में मनाते आ रहे हैं…
निश्चित रूप से भारतीय राजनीति में 6 अप्रैल एक तारीख मात्र नहीं है बल्कि राजनीतिक क्षितिज में एक उदीयमान राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी की स्थापना का पर्व तिथि है, क्योंकि आज राष्ट्र प्रथम भाव की विचारधारा से पोषित भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी सदस्यों वाली राजनीतिक दल है, जिसकी विचारधारा का विश्व पटल पर ऐतिहासिक सम्मान हो रहा है।
अटल आडवाणी कमल निशान की यह भारतीय जनता पार्टी आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व में बड़ी ताकत रूप में उभर रही है तथा केंद्र में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नए कीर्तिमान के साथ राष्ट्र सेवा के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।
पर, यह बात भी तय है कि सत्ता के साथ उसकी बुराइयां भी संगठन को दुष्प्रभावित करती हैं और यह बात BJP में भी भली भांति नजर आ रही है। जिस पर समय रहते नियंत्रण करने हेतु संगठन की महती भूमिका वक्त की मांग है।
चूंकि जन संघ अथवा भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता पार्टी के खिलाफ मतदान तो नहीं करता है पर जब जब दुखी हो कर अपने आप को घर के भीतर कैद कर लेता है तब न ही चेहरा काम आता है और चुनावी वैतरणी पार कर पाते हैं और यहां पर अटल जी साइनिंग इंडिया की भी हवा महल ढह जाती है और पुनर्मूसको भव: की उक्ति चरितार्थ होते नजर आती है।
आज स्थापना दिवस पर संकल्प लेना होगा कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिस कार्यकर्ता ने इमरजेंसी और कारसेवा की लाठियां खाई है तथा कारागारों मे बंद रहे हैं, उनको तिरस्कृत कर शॉर्ट टर्म वाले आयातित सत्ता सुखभोगियों से राम राज्य की कल्पना साकार नहीं हो सकती और न ही हमारे अग्रजों के अखंड भारत की सोच धरातल पर नजर आएगी। आइए! स्थापना दिवस पर संकल्प लें कि जिसने राष्ट्र प्रथम भाव की कसमें वादे के साथ राजनीतिक प्रक्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के कंधे से कंधा मिलाकर अपनी खून पसीना बहाया है उसका सम्मान BJP का प्रथम कर्तव्य होगा…जय हिन्द… वंदे मातरम…







