सोमन साहू/आरंग/प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आज विकासखंड स्तरीय रसोइया प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन पीएमश्री शासकीय अरुंधती देवी विद्यालय में किया गया। इस प्रशिक्षण में विकासखंड के 48 संकुल के विभिन्न स्कूलों से आए रसोइयों को भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिनेश शर्मा ने प्रशिक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रसोइया केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के रक्षक हैं और उन पर बच्चों के सेहत की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है साथ ही भ्रांति दूर करते हुवे कहा कि फोर्टीफाइड चावल प्लास्टिक चावल नहीं अपितु डब्लूएचओ के अनुसार यह कुपोषण एवं रक्त की कमी(एनीमिया) से लड़ने में प्रभावी है जो मिड डे मिल के माध्यम से उपलब्ध हो रहा है,उन्होंने सभी से शासन की गाइड लाइन के अनुसार बेहतर कार्य करने प्रेरित करते हुवे निर्देश दिए कि बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन में स्वच्छता और शुद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा साथ ही उन्होंने उनकी समस्याओं के बारे में चर्चा कर अभिव्यक्ति का अवसर भी दिया और कहा कि शासन आपकी समस्याओं के प्रति गंभीर है। सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी लाखेश्वर रात्रे ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि शासन की मंशानुसार रसोइयों का क्षमता विकास अनिवार्य है, ताकि वे नई तकनीकों और पोषण मानकों से अवगत हो सकें। उन्होंने स्कूलों में ‘किचन गार्डन’ को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

मध्याह्न भोजन प्रभारी (सहायक ग्रेड-2) घनश्याम रात्रे ने रसोइयों को विभागीय नियमों, चावल के स्टॉक प्रबंधन और एलपीजी सिलेंडर के सुरक्षित उपयोग के बारे में बारीकी से समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भोजन चखने के बाद ही बच्चों को परोसा जाए और इसका उचित रिकॉर्ड संधारित किया जाए।
मास्टर ट्रेनर प्रधान पाठक अरविंद वैष्णव एवं संकुल समन्वयक गिरिजा शंकर अग्रवाल ने प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया कि फोर्टीफाइड चावल में सूक्ष्म पोषक तत्व आयरन, फ़ालिक एसिड,विटामिन बी 12 की उपस्थिति बच्चों के लिए लाभदायक तथा फोर्टिफाइड चावल पकाने की सही विधि और उसके पोषण लाभ के अलावा कई भ्रम दूर किए गए। तथा संकुल समन्वयक गण रोशन चंद्राकर,अमित अग्रवाल,नूतन मंडले, विश्राम बंजारे आदि एवं ऑपरेटर लक्की डहरिया एवं भानु साहू,अजय काटले एवं बीईओ कार्यालयीन स्टाफ की विशेष सहभागिता रही ।
प्रशिक्षण के समापन पर उपस्थित लगभग 700 से अधिक रसोइयों ने संकल्प लिया कि वे “स्वच्छ भोजन, स्वस्थ बचपन” के ध्येय वाक्य को सार्थक करेंगे।







