Home मुख्य ख़बरें छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक अब बना कानून, राजपत्र में हुआ प्रकाशन; अवैध...

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक अब बना कानून, राजपत्र में हुआ प्रकाशन; अवैध धर्मांतरण पर सख्त सजा का प्रावधान

22
0

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जबरन या प्रलोभन देकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 अब कानून बन गया है। विधानसभा से पारित होने के बाद इस विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर किए गए और इसके साथ ही इसे छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर लागू कर दिया गया है।

यह विधेयक 19 मार्च को विधानसभा में विस्तृत चर्चा के बाद पारित किया गया था। सरकार का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों को नियंत्रित करना और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करना है।

क्यों लाया गया यह कानून?

सरकार के अनुसार वर्ष 1968 के पुराने प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार पर्याप्त नहीं थे। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े विवादों के कारण सामाजिक तनाव की स्थिति बनी रहती थी। ऐसे में एक मजबूत और स्पष्ट कानून की आवश्यकता महसूस की गई।

धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया होगी पारदर्शी

नए कानून के तहत अब कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे पहले अधिकृत अधिकारी को आवेदन देना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाएंगी। जांच पूरी होने के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की स्वतंत्रता रहेगी, लेकिन यह परिवर्तन दबाव, भय या प्रलोभन के आधार पर नहीं होना चाहिए।

संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य

धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों का पंजीयन अनिवार्य किया गया है। उन्हें हर साल विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। ग्राम सभाओं को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर निगरानी और पारदर्शिता बनी रहे।

सजा का सख्त प्रावधान

नए कानून में अवैध धर्मांतरण पर कड़े दंड तय किए गए हैं—

  • सामान्य अवैध धर्मांतरण: 7 से 10 वर्ष की कैद और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माना
  • महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा मामला: 10 से 20 वर्ष की कैद और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना
  • सामूहिक अवैध धर्मांतरण: 10 वर्ष से आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये जुर्माना
  • भय, प्रलोभन या धन के माध्यम से धर्मांतरण: 10 से 20 वर्ष की कैद और 20 से 30 लाख रुपये तक जुर्माना
  • दोबारा अपराध करने पर आजीवन कारावास का प्रावधान

जांच और न्यायिक प्रक्रिया

इस कानून के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी। इसके साथ ही अदालत में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय भी अधिसूचित किए जाएंगे।

पीड़ित को मिलेगा मुआवजा

यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन धोखे, दबाव या प्रलोभन से किया गया पाया जाता है, तो उसे पीड़ित माना जाएगा और अदालत आरोपी को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकती है।

यह कानून लागू होने के बाद राज्य सरकार का दावा है कि इससे धर्मांतरण से जुड़े विवादों में कमी आएगी और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here