मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने पहली बार संकेत दिए हैं कि वह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को तैयार है। हालांकि इसके बदले उसने अमेरिका से अपनी सैन्य और आर्थिक नाकेबंदी हटाने की शर्त रखी है।
सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। ईरान चाहता है कि पहले युद्ध खत्म हो और उसके बाद अन्य मुद्दों—खासकर परमाणु कार्यक्रम—पर चर्चा की जाए। लेकिन अमेरिका इस पर सहमत नहीं दिख रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि किसी भी समझौते में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को तुरंत शामिल करना जरूरी है। ट्रम्प प्रशासन साफ कर चुका है कि बिना परमाणु गतिविधियों पर रोक के कोई भी डील स्वीकार नहीं होगी।
वहीं, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान जानबूझकर परमाणु मुद्दे को टालकर पहले रणनीतिक बढ़त हासिल करना चाहता है। इस बीच विदेश मंत्री और अन्य नेताओं ने भी ईरान के इरादों पर सवाल उठाए हैं।
स्थिति को और जटिल बनाते हुए, ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए तैयार नहीं है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिलहाल ठप पड़ती नजर आ रही है।
उधर, वैश्विक स्तर पर इस टकराव का असर साफ दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, उसकी अनिश्चित स्थिति के कारण तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय बाजार दबाव में है।
ईरान की ओर से स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव जरूर आया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बड़ा मतभेद बना हुआ है। ऐसे में फिलहाल समाधान की राह आसान नहीं दिख रही।








